तेरी याद पई तड़पांदी ए ला लैयां नैनां ने झड़ियाँकदी इस रस्ते वी लंग माही ! तेरी दीद दी हसरतां हीन बड़ियाँ
तेरा नूरी ज़िक्र जदों होवे, मेरे ग़म दा मदावा बण जावेइंज हिज्र दी रात नूं चमकावे जीवें रौशन होवण फूलजड़ियाँ
जदों तेरा ग़ुलाम कहावाँ मैं, क्यूँ ख़ौफ़ किसे दा खावां मैंतेरे हुंदीयाँ ऐ मदनी आक़ा ! मैनूं देंदे नें लोकीं क्यूँ तड़ियाँ
किथे मेहर अली किथे मैं आसी, मैं ख़ादिम ओ मख़्दूम मेरेए फ़ैज़ रियाज़ अली दा ए, तेरे उत्ते ने रंगतां जो चड़ियाँ
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