नात लिरिक्स

Teri Madh-Khwan Har Zabaan Ghaus-e-Azam

तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ ग़ौस-ए-आज़म

नात ख़्वान: हूरिया फ़हीम क़ादरीशायर: मौलाना जमीलुर्रहमान क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रौनक़-ए-कुल-औलिया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !पेशवा-ए-अस्फ़िया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानीया महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी

पनाह-ए-ग़रीबाँ तेरी ज़ात-ए-वालातेरा घर है दारुल-अमाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानीया महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी

ज़माना न क्यूँकर हो मेहमाँ कि तुम नेबिछाया है रहमत का ख़्वाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानीया महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी

जिसे शक हो वो ख़िज़्र से पूछ देखेतेरी मजलिसों का समाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानीया महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी

तेरे वा'ज़ में आ के शाह-ए-'अरब नेबढ़ाई तेरी 'इज़्ज़-ओ-शाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानीया महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी

मिलेगा हमें तेरे दामन के नीचेदो 'आलम में अम्न-ओ-अमाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानीया महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी

जमील ! अब हो साकित मक़ाम-ए-अदब हैकहाँ तेरा मुँह और कहाँ ग़ौस-ए-आ'ज़म

तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानीया महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी

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