नात लिरिक्स

Machi Hai Dhoom Payambar Ki Aamad Aamad Hai

मची है धूम पयम्बर की आमद आमद है

शायर: मौलाना जमीलुर्रहमान क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मची है धूम, पयम्बर की आमद आमद हैहबीब-ए-ख़ालिक़-ए-अकबर की आमद आमद है

किया है सब्ज़ 'अलम नस्ब बाम-ए-का'बा परकि दो-जहान के सरवर की आमद आमद है

न क्यूँ हो नूर से तब्दील कुफ़्र की ज़ुल्मतख़ुदा के माह-ए-मुनव्वर की आमद आमद है

है जिब्रईल को हुक्म-ए-ख़ुदा ख़बर कर दोकि आज हक़ के पयम्बर की आमद आमद है

ख़ुशी के जोश में हैं बुलबुलें भी नग़्मा-कुनाँचमन में आज गुल-ए-तर की आमद आमद है

दो ज़ानू हो के अदब से पढ़ो सलात-ओ-सलाम'अज़ीज़-ओ-ख़ल्क़ के मसदर की आमद आमद है

जमील-ए-क़ादरी ! कह दे, खड़े हों अहल-ए-सुननहमारे हामी-ओ-यावर की आमद आमद है

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