नात लिरिक्स

Teri Janab Ke Jaisi Koi Janab Nahin

तेरी जनाब के जैसी कोई जनाब नहीं

नात ख़्वान: सक़लैन रशीदशायर: ए'जाज़ अहमद ए'जाज़ क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तेरी जनाब के जैसी कोई जनाब नहींतू ला-जवाब है, तेरा कोई जवाब नहीं

नबी तो और हसीन-ओ-जमील हैं लेकिनजो तुझ में आब है ऐसी किसी में आब नहीं

बना के हुस्न-ए-सरापा ये कह दिया रब नेतेरे शबाब के आगे कोई शबाब नहीं

तुम्हारे ज़ुल्फ़ है वल्लैल, वद्दुहा चेहरातुम्हारी मस्त नज़र का कोई जवाब नहीं

तुम्हारे नूर से शम्स-ओ-क़मर हुए रौशनवो कौन है जो तेरे दर से फ़ैज़याब नहीं

ख़ुदा ने तूर पे मूसा से लन-तरानी कहाकहा हबीब से, तुम से कोई हिजाब नहीं

हुज़ूर ! जिस को दिया तुम ने बे-हिसाब दियातुम्हारी देन में, आक़ा ! कोई हिसाब नहीं

कहाँ है मेरी नज़र उन की दीद के क़ाबिलवो मेरे दिल में हैं लेकिन नज़र को ताब नहीं

तेरी नज़र ने मुझे क्या से क्या बना डालातेरी 'इनायतें इतनी हैं कि हिसाब नहीं

उन्हें ख़ुदा ने बनाया है रहमत-ए-'आलमजो उन के हो गए उन को कोई 'अज़ाब नहीं

वो जिन को हाजत-ए-जन्नत है, या ख़ुदा ! दे देमेरा तो उन के सिवा कोई इंतिख़ाब नहीं

तुम्हारे नक़्श-ए-क़दम से जो हट गए हैं वहीहज़ार सज्दे करें फिर भी कामयाब नहीं

जो देख आए हैं, ए'जाज़ ! गुंबद-ए-ख़ज़रामैं कैसे कह दूँ कि दिल उन के आफ़ताब नहीं

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