तेरे सिवा किसी को पुकारा कभी नहींईमान डगमगाया हमारा कभी नहीं
हम ने तो अपने हाथ से रोका है ज़ुल्म कोहम ने किया है ज़ुल्म गवारा कभी नहीं
तेरे सिवा किसी को पुकारा कभी नहींईमान डगमगाया हमारा कभी नहीं
आक़ा, हुज़ूर आप हैं, मैं आप का ग़ुलामछोड़ूँगा अब मैं साथ तुम्हारा कभी नहीं
तेरे सिवा किसी को पुकारा कभी नहींईमान डगमगाया हमारा कभी नहीं
फिरते हैं दिल में ले के शहादत की आरज़ूसर से कफ़न भी हम ने उतारा कभी नहीं
तेरे सिवा किसी को पुकारा कभी नहींईमान डगमगाया हमारा कभी नहीं
सौदा जो अपनी जान का हम कर के आए हैंदुनिया में दिल लगा ही हमारा कभी नहीं
तेरे सिवा किसी को पुकारा कभी नहींईमान डगमगाया हमारा कभी नहीं
जन्नत का जब से मैंने इरादा किया, नईम !दुनिया को अपनी मैंने सँवारा कभी नहीं
तेरे सिवा किसी को पुकारा कभी नहींईमान डगमगाया हमारा कभी नहीं
केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।