नात लिरिक्स

Tere Qurban Pyare Muhammad | Gir Raha Hun Mujhe Bhi Sambhaalo

तेरे क़ुर्बान प्यारे मुहम्मद | गिर रहा हूँ मुझे भी सँभालो

नात ख़्वान: असग़र अली बंगशशायर: नुसरत फ़तेह अली ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जिस ने देखे नैन मतवाले तेरेमस्त-ओ-बेख़ुद हो न हो तो क्या करेएक नज़र जो देख ले, कहता फिरे

तेरे क़ुर्बान, प्यारे मुहम्मद !गिर रहा हूँ मुझे भी सँभालोअपने प्यारे नवासों का सदक़ाया नबी ! मेरी झोली में डालो

तेरे क़ुर्बान, प्यारे मुहम्मद !गिर रहा हूँ मुझे भी सँभालो

कोई अपना नहीं रोज़-ए-महशरहै यहाँ नफ़्स-ओ-नफ़्सी का 'आलमहम गुनहगार हैं, या मुहम्मद !अपनी कमली में हम को छुपा लो

तेरे क़ुर्बान, प्यारे मुहम्मद !गिर रहा हूँ मुझे भी सँभालो

बलग़ल-'उला बि-कमालिहिकशफ़-द्दुजा बि-जमालिहिह़सुनत जमी'उ ख़िसालिहिस़ल्लू 'अलैहि व आलिहि

ऐ ख़त्म-ए-रुसूल ! मक्की-मदनी !कौनैन में तुम सा कोई नहींऐ ख़त्म-ए-रुसूल !

तेरे क़ुर्बान, प्यारे मुहम्मद !गिर रहा हूँ मुझे भी सँभालो

नूर से नूर मिलने चला हैमुस्तफ़ा से ख़ुदा कह रहा हैये है मे'राज की रात, प्यारे !अपने चेहरे से पर्दा हटा लो

तेरे क़ुर्बान, प्यारे मुहम्मद !गिर रहा हूँ मुझे भी सँभालो

दूर हो जाएँगे सब अँधेरेनूर ही नूर आँखों में होगादेखना है अगर उन का जल्वाअपने दिल को मदीना बना लो

तेरे क़ुर्बान, प्यारे मुहम्मद !गिर रहा हूँ मुझे भी सँभालो

सल्ले 'अला नबिय्येनासल्ले 'अला मुहम्मदिन

तेरे क़ुर्बान, प्यारे मुहम्मद !गिर रहा हूँ मुझे भी सँभालो

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