नात लिरिक्स

Tere Naukar Hain Hum Ya Hussain

तेरे नौकर हैं हम या हुसैन

नात ख़्वान: उमैर ज़ुबैरशायर: सुहैल कलीम फ़ारूक़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तेरे नौकर हैं हम, या हुसैन !कर दो नज़र-ए-करम, या हुसैन !

आज तक लोग भूले नहींतेरे बच्चों का ग़म, या हुसैन !

कर दो नज़र-ए-करम, या हुसैन !

तेरे नौकर हैं हम, या हुसैन !कर दो नज़र-ए-करम, या हुसैन !

मेरे आक़ा हुसैन ! मेरे मौला हुसैन !मेरे हादी हुसैन ! मेरे मुर्शिद हुसैन !

शाह अस्त हुसैन, बादशाह अस्त हुसैनसर दाद, न दाद दस्त दर दस्त-ए-यज़ीदहक़्क़ा कि बिना ला इलाह अस्त हुसैन

ख़ाक-ए-कर्बल का ए'ज़ाज़ हैतेरे नक़्श-ए-क़दम, या हुसैन !

कर दो नज़र-ए-करम, या हुसैन !

तेरे नौकर हैं हम, या हुसैन !कर दो नज़र-ए-करम, या हुसैन !

मेरे आक़ा हुसैन ! मेरे मौला हुसैन !मेरे हादी हुसैन ! मेरे मुर्शिद हुसैन !

शाह अस्त हुसैन, बादशाह अस्त हुसैनसर दाद, न दाद दस्त दर दस्त-ए-यज़ीदहक़्क़ा कि बिना ला इलाह अस्त हुसैन

तेरे नाना का दीदार होजब भी निकले ये दम, या हुसैन !

कर दो नज़र-ए-करम, या हुसैन !

तेरे नौकर हैं हम, या हुसैन !कर दो नज़र-ए-करम, या हुसैन !

मेरे आक़ा हुसैन ! मेरे मौला हुसैन !मेरे हादी हुसैन ! मेरे मुर्शिद हुसैन !

शाह अस्त हुसैन, बादशाह अस्त हुसैनसर दाद, न दाद दस्त दर दस्त-ए-यज़ीदहक़्क़ा कि बिना ला इलाह अस्त हुसैन

सब की क़िस्मत में होता नहींख़ास है तेरा ग़म, या हुसैन !

कर दो नज़र-ए-करम, या हुसैन !

तेरे नौकर हैं हम, या हुसैन !कर दो नज़र-ए-करम, या हुसैन !

मेरे आक़ा हुसैन ! मेरे मौला हुसैन !मेरे हादी हुसैन ! मेरे मुर्शिद हुसैन !

शाह अस्त हुसैन, बादशाह अस्त हुसैनसर दाद, न दाद दस्त दर दस्त-ए-यज़ीदहक़्क़ा कि बिना ला इलाह अस्त हुसैन

'अर्ज़ फ़ारूक़ी करता है येमेरा रखना भरम, या हुसैन !

कर दो नज़र-ए-करम, या हुसैन !

तेरे नौकर हैं हम, या हुसैन !कर दो नज़र-ए-करम, या हुसैन !

मेरे आक़ा हुसैन ! मेरे मौला हुसैन !मेरे हादी हुसैन ! मेरे मुर्शिद हुसैन !

शाह अस्त हुसैन, बादशाह अस्त हुसैनसर दाद, न दाद दस्त दर दस्त-ए-यज़ीदहक़्क़ा कि बिना ला इलाह अस्त हुसैन

तेरा नाना है रब का नबी, या हुसैन !तेरा बाबा है मौला 'अली, या हुसैन !

ज़िक्र किस का करूँ ? नाम किस किस का लूँ ?तेरा सारा ही घर है सख़ी, या हुसैन !

हर ज़माना है तेरा ज़माना, शहा !हर सदी है तुम्हारी सदी, या हुसैन !

एक पल न तेरी याद भूले हमेंज़िक्र तेरा करें हर घड़ी, या हुसैन !

ये सुहैल आप का मन्क़बत-ख़्वान हैहै 'अता इस पे भी आप की, या हुसैन !

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