नात लिरिक्स

Teergi Mein Ujala Hamara Nabi | Sab Se Aula o Aala Hamara Nabi With Tazmeen

तीरगी में उजाला हमारा नबी | सब से औला-ओ-आला हमारा नबी तज़मीन के साथ

नात ख़्वान: मौलाना मुहम्मद नवीद सिआलवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तीरगी में उजाला हमारा नबीरौशनी का हवाला हमारा नबीग़ैब-दाँ, कमली वाला हमारा नबीसब से औला-ओ-आ'ला हमारा नबीसब से बाला-ओ-वाला हमारा नबी

बहर-ए-ग़म में किनारा हमारा नबीचश्म-ए-'आलम का तारा हमारा नबीआमिना का दुलारा हमारा नबीअपने मौला का प्यारा हमारा नबीदोनों 'आलम का दूल्हा हमारा नबी

जिस की तब्लीग़ से हक़ नुमायाँ हुआबुत-कदा जिस की आमद से वीराँ हुआजिस के जल्वों से इब्लीस लर्ज़ां हुआबज़्म-ए-आख़िर का शम'-ए-फ़रोज़ाँ हुआनूर-ए-अव्वल का जल्वा हमारा नबी

दर पे ग़ैरों के ज़हमत न फ़रमाइएभीक लेने मदीने चले जाइएकोई देता है तो सामने लाइएकौन देता है देने को मुँह चाहिएदेने वाला है सच्चा हमारा नबी

पेश-ए-दावर जो है 'आसियों का वकीलजिस के हाथों से मंज़ूर होगी अपीलजिस का मुखड़ा है ख़ुद मग़्फ़िरत की दलीलजिस की दो बूँद हैं कौसर-ओ-सलसबीलहै वो रहमत का दरिया हमारा नबी

जिस के 'इरफ़ाँ पे मौक़ूफ़ 'इरफ़ान-ए-ज़ातजिस की रहमत के साए में है काइनातजिस के दर से निकलती है राह-ए-नजातजिस के तल्वों का धोवन है आब-ए-हयातहै वो जान-ए-मसीहा हमारा नबी

अल्लाह अल्लाह वो उम्मी-ओ-उस्ताद-ए-कुलमच गया जिस की बे'सत पे मक्के में ग़ुलरहबर-ए-इंस-ओ-जाँ, मुंतहा-ए-सुबुलख़ल्क़ से औलिया, औलिया से रुसुलऔर रसूलों से आ'ला हमारा नबी

जिस के अज़्कार की हैं सजी महफ़िलेंदम-क़दम से हैं जिस के ये सब रौनक़ेंबज़्म-ए-कौनैन में जिस की हैं ताबिशेंबुझ गईं जिस के आगे सभी मश'अलेंशम'अ वो ले कर आया हमारा नबी

फ़र्श को मोहर-ए-ए'ज़ाज़ जिस के क़दमजिस के अब्रू में इक दिल-रुबायाना ख़मवो जमीलुश्शियम, वो जलीलुल-हशमहुस्न खाता है जिस के नमक की क़समवो मलीह-ए-दिल-आरा हमारा नबी

जैसे मेहर-ए-समा एक है, वैसे हीजैसे रोज़-ए-जज़ा एक है, वैसे हीजैसे बाब-ए-'अता एक है, वैसे हीजैसे सब का ख़ुदा एक है वैसे हीइन का उन का तुम्हारा हमारा नबी

कितने रौशन दिए दम-ज़दन में बुझेकितने सर्व-ए-सही ज़ेर-ए-गर्दूं झुकेकितने दरिया यहाँ बहते बहते रुकेक्या ख़बर कितने तारे खिले छुप गएपर न डूबे न डूबा हमारा नबी

ज़िंदगी कितने मोती पिरोती रहीख़ुद में रंग-ए-तग़य्युर समोती रहीबीज क्या क्या तनव्वो' के बोती रहीक़रनों बदली रसूलों की होती रहीचाँद बदली का निकला हमारा नबी

अब न दिल पर कोई बात लीजे कि हैजाम-ए-कौसर कोई दम में पीजे कि हैऐ नसीर ! अब ज़रा ग़म न कीजे कि हैग़म-ज़दों को, रज़ा ! मुज़्दा दीजे कि हैबेकसों का सहारा हमारा नबी

कलाम:इमाम अहमद रज़ा ख़ान

तज़मीन:पीर नसीरुद्दीन नसीर

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।