तयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
अल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिनअल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिन
मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर हैतयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
अल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिनअल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिन
मेरे आक़ा मेरे सरवर, मेरा बेड़ा पार होतालिब हूं मैं आप का शाहा, मुझ को अता दीदार होनज़रे-करम सरकार आक़ा, नज़रे-करम सरकार होआपका मंगता, आपका साइल, हाज़िरे-दरबार हो
तयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर हैतयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
अल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिनअल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिन
रो रो वक़्त गुज़ारूं कैसे, अब तो बुलावा आ जाएमुजदा मुझ को हाज़री का काश ! कोई सुना जाएदिल को सुकून मुयस्सर हो और रूह को चैन भी आ जाएमैं ही तयबा जा पहुंचूं या दिल में तयबा समा जाए
तयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर हैतयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
अल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिनअल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिन
रहमते-आलम तेरा लक़ब है, तेरी ऊँची शान हैसारा आलम तेरा भिकारी, तू सब का सुलतान हैमुझ से ग़म के मारों का तो तुझ पे ही बस ईमान हैपास बुलालो अब तो आक़ा, मुद्दत से अरमान है
तयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर हैतयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
अल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिनअल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिन
जब भी क़ाफ़िला देखूं कोई तयबा नगर को जाता हैफूट फूट के दिल रोता है, मुझ को बड़ा तड़पाता हैमेरे दिल को पल भर भी फिर चैन ज़रा ना आता हैरुख़ तयबा की जानिब कर के बस ये केहता जाता है
तयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर हैतयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
अल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिनअल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिन
बड़ी दुआएं मांगी हमने, हम भी तयबा जाएंगेतयबा जाकर केहना आक़ा, कब वो हम को बुलाएंगेजब वो हम को बुलाएंगे फिर हम भी मदीने जाएंगेरो रो हाल सुनाएंगे और मिल कर सब ये गाएंगे
तयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर हैतयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
अल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिनअल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिन
मेरे शाहा आप के दर की कुल काएनात सुवाली हैसारे जहाँ का तू है दाता, तू उम्मत का वाली हैतुझ से मांगने वाला आक़ा, जाता न कोई खाली हैतेरे अहमद और हसन की तुझ बिन खस्ता-हाली है
तयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
मीठा मदीना दूर है, जाना भी ज़रूर हैतयबा बड़ी दूर आक़ा, तयबा बड़ी दूर
अल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिनअल्लाहुम्म स़ल्ले अ़ला सय्यिदिना मुह़म्मदिन
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