नात लिरिक्स

Tamanna Muddaton Se Hai Jamal-e-Mustafa Dekhun

तमन्ना मुद्दतों से है जमाल-ए-मुस्तफ़ा देखूँ

नात ख़्वान: एहसान तहमीदशायर: मुफ़्ती रज़ा-उल-हक़उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तमन्ना मुद्दतों से है, जमाल-ए-मुस्तफ़ा देखूँइमाम-उल-अंबिया देखूँ, हबीब-ए-किब्रिया देखूँ

वो जिन के दम-क़दम से सुब्ह ने भी रौशनी पाईमुनव्वर कर दिया जिस ने फ़ज़ा, वो रहनुमा देखूँ

वो जिन की बरकतों से अब्र-ओ-बाराँ बस्ते 'आलम मेंतमन्ना क़ल्ब-ए-मुज़्तर की, वो दुर्र-ए-बे-बहा देखूँ

क़दम बाहर मदीने से, तसव्वुर में मदीना हैइलाही या इलाही ! 'अज़्मतों की इंतिहा देखूँ

ये दुनिया बे-सबात-ओ-बे-वफ़ा-ओ-ग़म का गहवाराये है मतलूब, दार-ए-बे-वफ़ाई में वफ़ा देखूँ

वो मब्दा ख़ल्क़-ए-'आलम का, दुरूद उन पर, सलाम उन परमेरे मौला ! ये मौक़ा' दे कि ख़तमुल-अंबिया देखूँ

कभी हो हुस्न की महफ़िल, कभी हो शौक़ का मंज़रकभी आँसू की ज़ंजीरों में 'आशिक़ की सदा देखूँ

रसूलुन-क़ासिम-उल-ख़ैराति फ़ि-द्दुनिया व फ़िल-'उक़्बाशफ़ीक़ अज़ नफ़्स-ए-मा दर मा नबी-ए-मुजतबा देखूँ

दर-ए-जन्नत पे हाज़िर हों रसूल-ए-पाक के हम-राहशफ़ा'अत का ये मंज़र या ख़ुदाया मैं रज़ा देखूँ

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