नात लिरिक्स

Takbeer Ka Ham Naa'ra Har Baar Lagaaenge, Parde Mein Badan Apna Taa-Maut Chhupaaenge

तकबीर का हम ना'रा हर बार लगाएँगे, पर्दे में बदन अपना ता-मौत छुपाएँगे

नात ख़्वान: सुमैया ग़ज़ालाउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तकबीर का हम ना'रा हर बार लगाएँगेपर्दे में बदन अपना ता-मौत छुपाएँगे

तकबीर के ना'रों से दुनिया को हिला देंगेअपने पे जो आ जाएँ, कोहराम मचा देंगेपर्दे के लिए अपनी हम जान लुटा देंगेजितने भी सितम ढा दो, पर्दा न हटाएँगे

तकबीर का हम ना'रा हर बार लगाएँगेपर्दे में बदन अपना ता-मौत छुपाएँगे

तूफ़ान-ए-समंदर हैं, साहिल न हमें समझोहम आहनी दीवारें, तुम गिल न हमें समझोलड़की हैं समझ कर तुम बुज़दिल न हमें समझोफ़िर'औन के लश्कर से हम ख़ौफ़ न खाएँगे

तकबीर का हम ना'रा हर बार लगाएँगेपर्दे में बदन अपना ता-मौत छुपाएँगे

फ़िर'औन अगर तुम हो, मूसा का 'असा हम हैंआँधी न बुझा पाए, रौशन वो दिया हम हैंबू-जहल अगर तुम हो, तो हक़ की सदा हम हैंहम ख़ौफ़ से सर अपना हरगिज़ न झुकाएँगे

तकबीर का हम ना'रा हर बार लगाएँगेपर्दे में बदन अपना ता-मौत छुपाएँगे

डर जाएँ जो दुश्मन से, वो क़ौम नहीं हैं हमलौट आएँ जो आँगन से वो क़ौम नहीं हैं हमघबराएँ जो रह-ज़न से वो क़ौम नहीं हैं हमहर हाल में हक़ अपना ले कर के ही जाएँगे

तकबीर का हम ना'रा हर बार लगाएँगेपर्दे में बदन अपना ता-मौत छुपाएँगे

ख़ौला का जिगर हम हैं, ज़हरा की हया हम हैंहम बिन्त-ए-सुमय्या हैं, हफ़्सा की अदा हम हैंमरयम की कनीज़ाएँ, सौदा की वफ़ा हम हैंइस्लाम को हम अपने रुस्वा न कराएँगे

तकबीर का हम ना'रा हर बार लगाएँगेपर्दे में बदन अपना ता-मौत छुपाएँगे

जो ज़ैब नहीं देती, जा'फ़र ! वो शरारत क्यूँपर्दे से भला तुम को है इतनी शिकायत क्यूँइस्लाम से नफ़रत क्यूँ, पर्दे से 'अदावत क्यूँबे-पर्दा कभी घर से बाहर नहीं आएँगे

तकबीर का हम ना'रा हर बार लगाएँगेपर्दे में बदन अपना ता-मौत छुपाएँगे

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।