नात लिरिक्स

Sunniyon Ka Nara Hai Ahmad Raza Hamara Hai

सुन्नियों का नारा है अहमद रज़ा हमारा है

नात ख़्वान: नईम अख़्तरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सुन्नियों का ना'रा है, अहमद रज़ा हमारा है

जब मैं ने सुनाई ना'त-ए-नबीसुन हो गया नज्दी सुनते हीसुन्नी ने सुना, सुन कर ये कहासुब्हानल्लाह, सुब्हानल्लाह

सुन्नियों का ना'रा है, अहमद रज़ा हमारा है

रज़ा के नाम पर सारा ज़माना नाज़ करता हैये वो मंसब है जो इक ख़ुश-क़िस्मत को मिलता है

रज़ा के नाम पर मरते हैं लाखों लोग दुनिया मेंकोई हँस हँस के मरता है, कोई जल जल के मरता है

सुन्नियों का ना'रा है, अहमद रज़ा हमारा है

जाम-ए-कौसर पी गए तो माहताबी हो गएग़म से मुरझाए हुए चेहरे गुलाबी हो गए

बू-बकर, फ़ारूक़-ओ-'उस्माँ, हैदर-ओ-तल्हा, बिलालआमिना के चाँद को देखा, सहाबी हो गए

क़ादरी-ओ-अशरफ़ी, रज़वी बने अहल-ए-सुननकौवा जितने खाने वाले थे वहाबी हो गए

सुन्नियों का ना'रा है, अहमद रज़ा हमारा है

तू ने बातिल को मिटाया, ऐ इमाम अहमद रज़ा !दीन का डंका बजाया, ऐ इमाम अहमद रज़ा !

ज़ोर बाति़ल और ज़लालत का था जिस दम हिन्द मेंतू मुजद्दिद बन के आया, ऐ इमाम अहमद रज़ा !

सुन्नियों का ना'रा है, अहमद रज़ा हमारा है

ज़माना तूफ़ाँ उठाए लेकिन जहाँ रज़ा का ग़ुलाम होगावहाँ सदा-ए-दुरूद होगी, सलाम होगा, क़याम होगा

अगर क़यामत में इस सदी के तमाम शा'इर बुलाए जाएँमुक़ाबला फिर कलाम का हो, रज़ा इमामुल-कलाम होगा

सुन्नियों का ना'रा है, अहमद रज़ा हमारा है

सारे जहाँ पे छाया, अहमद रज़ा हमारासुन्नी के दिल को भाया, अहमद रज़ा हमारामुश्किल में पड़ गए थे सारे जहाँ के सुन्नीजिस ने हमें बचाया, अहमद रज़ा हमारा

सुन्नियों का नारा है, अह़मद रज़ा हमारा है

या ख़ुदा ! बज़्म-ए-कौनैन में ता-अबदशम'-ए-बज़्म-ए-हिदायत सलामत रहेमस्लक-ए-आ'ला हज़रत के जितने हैं फूलसारे फूलों की निकहत सलामत रहे

रोज़-ए-महशर अगर मुझ से पूछे ख़ुदाबोल आल-ए-रसूल तू लाया है क्या'अर्ज़ कर दूँगा लाया हूँ अहमद रज़ाया ख़ुदा ! ये अमानत सलामत रहे

लाख जलते रहें दुश्मनान-ए-रज़ाकम न होंगे कभी मदह-ख़्वान-ए-रज़ाकह रहे हैं सभी 'आशिक़ान-ए-रज़ामस्लक-ए-आ'ला हज़रत सलामत रहे

सुन्नियों का नारा है, अह़मद रज़ा हमारा है

नबी की मिदहत जो करना हम को सिखा रहा है, मेरा रज़ा हैहमारे दिल में नबी की 'अज़मत बिठा रहा है, मेरा रज़ा है

हज़ारों तसनीफ़ें आ'ला हज़रत जो आज हम को मिली हुईं हैंजो आज भी सुन्नियत की 'अज़मत बचा रहा है, मेरा रज़ा है

सहाबियों से कहें ये आक़ा कि आने वाला है मेरा 'आशिक़लो आ रहा है, वो आ रहा है, जो आ रहा है, मेरा रज़ा है

बनाओ टोली, लगाओ चिल्ले, चुरा न पाओगे ईमाँ मेराजो नज्दियों से हमारा ईमाँ बचा रहा है, मेरा रज़ा है

सुन्नियों का नारा है, अह़मद रज़ा हमारा है

नबी की मिदहत जो करना हमको सीखा रहा है, मेरा रज़ा हैहमारे दिल में नबी की 'अज़मत बिठा रहा है, मेरा रज़ा है

मेरी क्या औक़ात ! क्या लिखूँ मैं ! क़लम में इतनी नहीं है ताक़तसलीम से जो नबी की ना'तें लिखा रहा है, मेरा रज़ा है

वहाबियों का नसीब ही ये कि कौवे खाएँ वो काले कालेजो सुन्नियों को मुर्ग़-ए-मुसल्लम खिला रहा है, मेरा रज़ा है

सुन्नियों का ना'रा है, अहमद रज़ा हमारा है

हज अदा करने गया था एक नज्दी अब के सालसंग-रेज़ी के लिए उस को मिना जाना पड़ा

एक कंकर मारा ही था, कान में आई सदातू तो अपना आदमी था, तुझ को ये क्या हो गया ?

सुन्नियों का ना'रा है, अहमद रज़ा हमारा है

बा-ख़ुदा मुल्क-ए-सुख़न की शान है अहमद रज़ामुस्तफ़ा के 'आशिक़ों की जान है अहमद रज़ा

नज्दिया ! टकराएगा तो ख़ाक में मिल जाएगानज्दियों के वास्ते तूफ़ान है अहमद रज़ा

सुन्नियों का ना'रा है, अहमद रज़ा हमारा है

ऐ न'ईम अख़्तर ! सर-ए-बाज़ार करते जाएँगेआ'ला हज़रत का सभी परचार करते जाएँगे

इस का ग़म कुछ भी नहीं है, चाहे दुनिया कुछ कहेजब तलक है साँस उन से प्यार करते जाएँगे

सुन्नियों का ना'रा है, अहमद रज़ा हमारा है

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