नात लिरिक्स

Sune Kaun Qissa-e-Dard-e-Dil Mera Gham-gusar Chala Gaya

सुने कौन क़िस्सा-ए-दर्द-ए-दिल मेरा ग़म-गुसार चला गया

नात ख़्वान: गुल तरफ़ अहमदशायर: पीर नसीरुद्दीन नसीरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सुने कौन क़िस्सा-ए-दर्द-ए-दिल, मेरा ग़म-गुसार चला गयाजिसे आश्नाओं का पास था, वो वफ़ा-शि'आर चला गया

वही बज़्म है, वही धूम है, वही 'आशिक़ों का हुजूम हैहै कमी तो बस मेरे चाँद की जो तह-ए-मज़ार चला गया

वो सुख़न-शनास, वो दूर-बीं, वो गदा-नवाज़, वो मह-जबींवो हसीं, वो बहर-ए-'उलूम-ए-दीं, मेरा ताजदार चला गया

कहाँ अब सुख़न में वो गर्मियाँ कि नहीं रहा कोई क़द्र-दाँकहाँ अब वो शौक़ में मस्तियाँ कि वो पुर-वक़ार चला गया

जिसे मैं सुनाता था दर्द-ए-दिल, वो जो पूछता था ग़म-ए-दुरूँवो गदा-नवाज़ बिछड़ गया, वो 'अता-शि'आर चला गया

बहें क्यूँ, नसीर ! न अश्क-ए-ग़म, रहे क्यूँ न लब पे मेरे फ़ुग़ाँहमें बे-क़रार वो छोड़ कर, सर-ए-रह-गुज़ार चला गया

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