नात लिरिक्स

Sultan-ul-Hind Ki Chaukhat Par Taqdeer Banane Aaya Hoon

सुल्तान-उल-हिन्द की चौखट पर तक़दीर बनाने आया हूँ

नात ख़्वान: जावेद रज़ा क़ादरी बासनीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सुल्तान-उल-हिन्द की चौखट पर तक़दीर बनाने आया हूँअफ़्साना-ए-दर्द-ए-हिज्र-ओ-अलम रो रो कर सुनाने आया हूँ

हाँ ! चश्मा-ए-फ़ैज़-ए-रहमत पर मैं प्यास बुझाने आया हूँमैं चिश्त के मय-ख़ाने वाली सहबा छलकाने आया हूँ

क्या भूल हुई आख़िर मुझ से, क्यूँ ख़्वाब में आना छोड़ दियारूठे हुए अपने ख़्वाजा को मैं आज मनाने आया हूँ

क्या पेश करूँ, क्या नज़्र करूँ, सरकार ! किसी क़ाबिल ही नहींकुछ फूल 'अक़ीदत के हैं जिन्हें तुर्बत पे चढ़ाने आया हूँ

बेताब है दिल, बेचैन है जाँ, राहत का कोई सामान नहींजलता है मेरा ख़िरमन जिस से, वो आग बुझाने आया हूँ

सदक़े में जनाब-ए-उस्माँ के, मुझ पर भी करम की एक नज़रधोराजी से अजमेर नगर फ़रियाद सुनाने आया हूँ

जो बख़्त के मारे आते हैं, काम उन के यहाँ बन जाते हैंख़्वाबीदा-मुक़द्दर हूँ मैं भी, तक़दीर जगाने आया हूँ

जब राज़-ओ-नियाज़ का 'आलम हो, अल्लाह से होती हों बातेंउस वक़्त न भूलें आप मुझे, ये याद दिलाने आया हूँ

दीदार का दिल में शौक़ लिए कहता है तुम्हारा ये सय्यदसुल्तान-उल-हिन्द के जल्वों को आँखों में बसाने आया हूँ

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