नात लिरिक्स

Sirf Ek Baar | Dil Se Mustafa Ko Tu Pukaar | Hoga Beda Paar | Aise Hain Sarkaar Mere

सिर्फ़ एक बार | दिल से मुस्तफ़ा को तू पुकार | होगा बेड़ा पार | ऐसे हैं सरकार मेरे

नात ख़्वान: मुहम्मद अहसन क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सिर्फ़ एक बार, सिर्फ़ एक बारसिर्फ़ एक बार, सिर्फ़ एक बार

दिल से मुस्तफ़ा को तू पुकार

होगा बेड़ा पार, होगा बेड़ा पारहोगा बेड़ा पार, होगा बेड़ा पार

जहाँ जहाँ भी गए वो करम ही करते गएकिसी ने माँगा न माँगा वो झोली भरते गए

ऐसे हैं सरकार मेरे, ऐसे हैं सरकारऐसे हैं सरकार मेरे, ऐसे हैं सरकार

कोई आ जाए, तलब से भी सिवा देते हैंआए बीमार तो हर दुख की दवा देते हैंसंग मारे जो कोई उस को दु'आ देते हैंदुश्मन आ जाए तो चादर भी बिछा देते हैं

ऐसे हैं सरकार मेरे, ऐसे हैं सरकारऐसे हैं सरकार मेरे, ऐसे हैं सरकार

दिल से मुस्तफ़ा को तू पुकार

होगा बेड़ा पार, होगा बेड़ा पारहोगा बेड़ा पार, होगा बेड़ा पार

वो करम चाहें जहाँ पर भी वहीं करते हैंफ़ैसले गुंबद-ए-ख़ज़रा के मकीं करते हैंजिन पे करते हैं इन'आमात की बारिश आक़ाउस की क़िस्मत में मदीने की ज़मीं करते हैं

ऐसे हैं सरकार मेरे, ऐसे हैं सरकारऐसे हैं सरकार मेरे, ऐसे हैं सरकार

दिल से मुस्तफ़ा को तू पुकार

होगा बेड़ा पार, होगा बेड़ा पारहोगा बेड़ा पार, होगा बेड़ा पार

कहा मजनूँ ने, कोई मिस्ल-ए-लैला हो नहीं सकताकहा फ़रहाद ने, शीरीं के जैसा हो नहीं सकताज़ुलेख़ा ने कहा, यूसुफ़ से अच्छा हो नहीं सकताकहा इन सब से मैंने, सब ये मुमकिन है मगर सुन लोमुहम्मद दूसरा दुनिया में पैदा हो नहीं सकता

ऐसे हैं सरकार मेरे, ऐसे हैं सरकारऐसे हैं सरकार मेरे, ऐसे हैं सरकार

दिल से मुस्तफ़ा को तू पुकार

होगा बेड़ा पार, होगा बेड़ा पारहोगा बेड़ा पार, होगा बेड़ा पार

यूँ तो धूप मदीने का पता देती है'इश्क़ वालों को तो गर्मी भी मज़ा देती हैक्यूँ कि सूरज की अगर एक किरन रोज़ानाख़ूब दीवार-ए-मदीना का मज़ा लेती है

सिर्फ़ एक बार, सिर्फ़ एक बारसिर्फ़ एक बार, सिर्फ़ एक बार

ऐसे हैं सरकार मेरे, ऐसे हैं सरकारऐसे हैं सरकार मेरे, ऐसे हैं सरकार

दिल से मुस्तफ़ा को तू पुकार

होगा बेड़ा पार, होगा बेड़ा पारहोगा बेड़ा पार, होगा बेड़ा पार

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