नात लिरिक्स

Shukriya Ahmad Raza | Tera Hi Charcha Rahega Aye Bareilly Ke Raza

शुक्रिया अहमद रज़ा | तेरा ही चर्चा रहेगा ऐ बरेली के रज़ा

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: शौक़ फ़रीदी इंडियाउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बरेली के रज़ा ! बरेली के रज़ा !बरेली के रज़ा ! बरेली के रज़ा !

शुक्रिया मेरे रज़ा ! शुक्रिया मेरे रज़ा !शुक्रिया मेरे रज़ा ! शुक्रिया मेरे रज़ा !

शुक्रिया अहमद रज़ा ! शुक्रिया है तेराशुक्रिया अहमद रज़ा ! शुक्रिया है तेरा

'इश्क़-ओ-मोहब्बत 'इश्क़-ओ-मोहब्बत !आ'ला हज़रत आ'ला हज़रत !

आप से सीखा है हम ने, ऐ रज़ा ! 'इश्क़-ए-नबीआप ने हम को बनाया 'आशिक़-ए-मौला-'अलीआप का एहसान ये कैसे भुलाया जाएगाअहमद रज़ा ! अहमद रज़ा !तेरा ही चर्चा रहेगा, ऐ बरेली के रज़ा !

शुक्रिया अहमद रज़ा ! शुक्रिया है तेराशुक्रिया अहमद रज़ा ! शुक्रिया है तेरा

सुन्नियों के पेशवा, ऐ इमाम अहमद रज़ा !सुन्नियों के रहनुमा, ऐ इमाम अहमद रज़ा !

ना'त पढ़ना, ना'त लिखना, ना'त सुनना  काम थाआप का ख़ामा फ़क़त ख़ैर-उल-वरा के नाम थाजब तलक जारी सफ़र है मिदहत-ए-सरकार काअहमद रज़ा ! अहमद रज़ा !तेरा ही चर्चा रहेगा, ऐ बरेली के रज़ा !

शुक्रिया अहमद रज़ा ! शुक्रिया है तेराशुक्रिया अहमद रज़ा ! शुक्रिया है तेरा

'इश्क़-ओ-मोहब्बत 'इश्क़-ओ-मोहब्बत !आ'ला हज़रत आ'ला हज़रत

सुन्नियों को आप ने बख़्शा फ़तावा रज़वियाकंज़ुल-ईमाँ दे के ईमान और पुख़्ता कर दियाजब भी ईमान-ओ-'अक़ीदे पर छिड़ेगा तब्सिराअहमद रज़ा ! अहमद रज़ा !तेरा ही चर्चा रहेगा, ऐ बरेली के रज़ा !

मुस्तफ़ा के पाले हैं, हम बरेली वाले हैंदिल से भोले-भाले हैं, हम बरेली वाले हैं

दम रज़ा का भरते हैं, हम बरेली वाले हैंख़्वाजा ख़्वाजा करते हैं, हम बरेली वाले हैं

आप से सीखा अदब सरकार के असहाब कासय्यिदा का और उन की आल का, अहबाब काजब तलक क़ाइम रहेगा सय्यिदों का सिलसिलाअहमद रज़ा ! अहमद रज़ा !तेरा ही चर्चा रहेगा, ऐ बरेली के रज़ा !

शुक्रिया अहमद रज़ा ! शुक्रिया है तेराशुक्रिया अहमद रज़ा ! शुक्रिया है तेरा

आप अहल-ए-शर की ख़ातिर हैदरी शमशीर हैंहज़रत-ए-मौला 'उमर के क़हर की तस्वीर हैंज़िक्र होगा जब अशिद्दाउ 'अलल-कुफ़्फ़ार काअहमद रज़ा ! अहमद रज़ा !तेरा ही चर्चा रहेगा, ऐ बरेली के रज़ा !

शुक्रिया अहमद रज़ा ! शुक्रिया है तेराशुक्रिया अहमद रज़ा ! शुक्रिया है तेरा

'इश्क़-ओ-मोहब्बत 'इश्क़-ओ-मोहब्बत !आ'ला हज़रत आ'ला हज़रत

लाख हो जाए मुख़ालिफ़ कुल जहाँ कुछ ग़म नहींमुझ को उन से 'इश्क़ है, जो होगा हरगिज़ कम नहीं'उम्र-भर, शौक़-ए-फ़रीदी ! मैं कहूँगा बरमलाअहमद रज़ा ! अहमद रज़ा !तेरा ही चर्चा रहेगा, ऐ बरेली के रज़ा !

शुक्रिया अहमद रज़ा ! शुक्रिया है तेराशुक्रिया अहमद रज़ा ! शुक्रिया है तेरा

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