नात लिरिक्स

Shikasta Dil Hun Khamosh Lab Hain Jabeen Ko Dar Pe Tere Jhukaya

शिकस्ता-दिल हूँ ख़मोश लब हैं जबीं को दर पे तेरे झुकाया

शायर: ज़ुलक़रनैन इब्न-ए-सादिक़उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

शिकस्ता-दिल हूँ, ख़मोश लब हैं, जबीं को दर पे तेरे झुकायाहैं ग़म मुसलसल, हैं दर्द पैहम, मेरी भी सुन ले सदा, ख़ुदाया !

रहा हूँ ग़ाफ़िल मैं हक़ से हर दम, मैं राह-ए-शैताँ पे चल पड़ा थामेरी ख़ताओं को माफ़ कर दे, जो मैं ने ग़फ़लत में कर गुज़ारा

शिकस्ता-दिल हूँ, ख़मोश लब हैं, जबीं को दर पे तेरे झुकायाहैं ग़म मुसलसल, हैं दर्द पैहम, मेरी भी सुन ले सदा, ख़ुदाया !

मैं सैल-ए-'इस्याँ में दब गया हूँ, मैं तेरी राह से भटक गया हूँहै तेरी सत्तार ज़ात, मौला ! है राज़ पिन्हाँ तुझे बताया

शिकस्ता-दिल हूँ, ख़मोश लब हैं, जबीं को दर पे तेरे झुकायाहैं ग़म मुसलसल, हैं दर्द पैहम, मेरी भी सुन ले सदा, ख़ुदाया !

भटक के चौखट से तेरी, या रब ! भटक रहा हूँ मैं बे-ठिकानाये ज़िंदगी मेरी है परेशाँ, जहाँ ने मुझ को बहुत रुलाया

शिकस्ता-दिल हूँ, ख़मोश लब हैं, जबीं को दर पे तेरे झुकायाहैं ग़म मुसलसल, हैं दर्द पैहम, मेरी भी सुन ले सदा, ख़ुदाया !

हूँ नफ़्स-ओ-शैतान के असर से उदास अपनी ही ज़िंदगी मेंहमेशा बेकार चाहतों ने मुझे दुखाया बेहद सताया

शिकस्ता-दिल हूँ, ख़मोश लब हैं, जबीं को दर पे तेरे झुकायाहैं ग़म मुसलसल, हैं दर्द पैहम, मेरी भी सुन ले सदा, ख़ुदाया !

ऐ मौला ! 'इज़्ज़त-मआब कर दे, हर एक लग़्ज़िश मु'आफ़ कर देनहीं सिवा तेरे अब सहारा, हो चाहे अपना या हो पराया

शिकस्ता-दिल हूँ, ख़मोश लब हैं, जबीं को दर पे तेरे झुकायाहैं ग़म मुसलसल, हैं दर्द पैहम, मेरी भी सुन ले सदा, ख़ुदाया !

रहा हूँ ग़ाफ़िल मैं हक़ से हर दम, मैं राह-ए-शैताँ पे चल पड़ा थामेरी ख़ताओं को माफ़ कर दे, जो मैं ने ग़फ़लत में कर गुज़ारा

शिकस्ता-दिल हूँ, ख़मोश लब हैं, जबीं को दर पे तेरे झुकायाहैं ग़म मुसलसल, हैं दर्द पैहम, मेरी भी सुन ले सदा, ख़ुदाया !

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