नात लिरिक्स

Shan-e-Ramzan | Shan-e-Ramzan Ayan Charsoo | Danish & Dawar

शान-ए-रमज़ान | शान-ए-रमज़ाँ अयाँ चार-सू | दानिश और दावर

उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जान-ए-रमज़ाँ, शान-ए-रमज़ाँजान-ए-रमज़ाँ, शान-ए-रमज़ाँ

ज़िंदगी सब्र से आश्ना हो गईशान-ए-रमज़ाँ दहर में अयाँ हो गई

जो नज़र में नहीं था किनारा मिलाऐसा माह-ए-करम का सहारा मिला

अश्क आँखों से दामन में आ के गिरामुझ ख़ता-कार को क्या से क्या कर गया

बंदा करने लगा रब से यूँ गुफ़्तुगू

अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहुशान-ए-रमज़ाँ 'अयाँ चार-सू

माह-ए-रमज़ान यूँ आ गयाबन के रहमत ये फिर छा गया

कैसे तुझ से करूँ सामनागिर रहा हूँ, ज़रा थामना

ख़ाली दामन लिए आ गयाबिन तेरे मेरी हस्ती है क्या

लाज रखना मेरी, ऐ ख़ुदा !वास्ता माह-ए-रमज़ान का

बस झुका है ये सर और क्या माँगनाबंदा परवर है तू, बस ज़रा देखना

तेरी मर्ज़ी को पाना मेरी जुस्तुजू

अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहुशान-ए-रमज़ाँ 'अयाँ चार-सू

बरकतें यूँ फ़लक से उतरने लगींकिरनें जैसे फ़लक पर बिखरने लगीं

सिलसिला रहमतों का दु'आ से मिलाने'मतों का ये कैसा महीना मिला

आओ मिल बाँट कर, बाँट लो हर ख़ुशीहाँ ! यही है 'इबादत, यही बंदगी

शान-ए-रमज़ान है दिलकश-ओ-ख़ूब-रू

अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहुशान-ए-रमज़ाँ 'अयाँ चार-सू

नशीद-ख़्वाँ:दानिश ऍफ़ दारदावर फ़ारूक़

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