नात लिरिक्स

Shaida Tumhara Hai Ye Sara Aalam | Ya Ghaus-e-Azam Ya Ghaus-e-Azam

शैदा तुम्हारा है ये सारा आलम | या ग़ौस-ए-आज़म या ग़ौस-ए-आज़म

नात ख़्वान: एहसान शाकिरशायर: एहसान शाकिरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

शैदा तुम्हारा है ये सारा 'आलमया ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

वक़्त-ए-विलादत थे क़ुरआँ के हाफ़िज़माँ के शिकम में थे माँ के मुहाफ़िज़तुम हो विलायत के मीनार-ए-मोहकमया ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

बचपन में बग़दाद पढ़ने को जाएँडाकू को डाके से तौबा कराएँये सच बताते हैं कपड़े में दिरहमया ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

बचपन में बग़दाद पढ़ने को जाएँडाकू को डाके से तौबा कराएँसच सच बताते हैं सदरी में दिरहमया ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

रमज़ाँ की पहली को तशरीफ़ लाएरख कर के रोज़ा जहाँ को बताएहै पहली तारीख़ माह-ए-मुकर्रमया ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

सदियों के मुर्दे थे उन को जिलायासदा क़ुम-बि-इज़्निल्लाह जब है लगायातुम डाल देते हो बे-दम में भी दमया ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

शाकिर को हर वक़्त रहता नशा हैजिस सिम्त देखे वो रौज़ा तेरा हैऐसा पिलाया है आँखों में ज़मज़मया ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या ग़ौस-ए-आ'ज़म !

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