नात लिरिक्स

Shahenshah-e-Aala Salamun Alaikum | Do Aalam Ke Aaqa Salamun Alaikum

शहंशाह-ए-आला सलामुन अलैकुम | दो आलम के आक़ा सलामुन अलैकुम

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताजुद्दीन रज़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

शहंशाह-ए-आ'ला ! सलामुन 'अलैकुमदो 'आलम के आक़ा ! सलामुन 'अलैकुम

तजल्ली-ए-मक्का ! सलामुन 'अलैकुमबहार-ए-मदीना ! सलामुन 'अलैकुम

तवल्लुद हुए जिस घड़ी मेरे आक़ातो का'बा पुकारा, सलामुन 'अलैकुम

हर इक गुल की टहनी से आवाज़ आईवो महबूब आया, सलामुन 'अलैकुम

शजर से हजर तक यही थीं सदाएँवो महबूब आया, सलामुन 'अलैकुम

पढ़ा संग-रेज़ों ने कलम-ए-शहादतबुतों ने पुकारा, सलामुन 'अलैकुम

हुए अंबिया औलिया सब बरातीबने आप दूल्हा, सलामुन 'अलैकुम

गए 'अर्श पर जिस घड़ी मेरे आक़ाख़ुदा ख़ुद पुकारा, सलामुन 'अलैकुम

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