नात लिरिक्स

Shah-Savaar-e-Karbala Ki Shah-Savaari Ko Salam

शह-सवार-ए-कर्बला की शह-सवारी को सलाम

शायर: साइम चिश्तीउपलब्ध: हिंदी

शह-सवार-ए-कर्बला,  शह-सवार-ए-कर्बला

अस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ामअस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

शह-सवार-ए-कर्बला की शह-सवारी को सलामनेज़े पर क़ुरआन पढ़ने वाले कारी को सलाम

अस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ामअस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

रात-दिन बिछड़े हुओं की याद में रहना खड़ेऐ हज़ीं सुब्हों ! तुम्हारी इंतिज़ारी को सलाम

अस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ामअस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

घर का घर सब लुट गया लेकिन निगाह उट्ठी नहींसय्यिदा ज़ैनब ! तुम्हारी पर्दा-दारी को सलाम

अस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ामअस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

मुस्कुराके पेश तेग़ों के किया रंगीं शबाबअकबर-ओ-क़ासिम ! तुम्हारी जाँ-निसारी को सलाम

अस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ामअस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

काँप उट्ठा है अर्श भी और आसमां थर्रा गयाअसग़र-ए-मज़लूम ! तेरी बे-क़रारी को सलाम

अस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ामअस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

पी के साइम झूमता था जिस को कर्बल का शहीदवादा-ए-इश्क़-ए-नबी ! तेरी ख़ुमारी को सलाम

अस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ामअस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

शह-सवार-ए-कर्बला की शह-सवारी को सलामनेज़े पर क़ुरआन पढ़ने वाले कारी को सलाम

अस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ामअस्सलाम - अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

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