नात लिरिक्स

Shaah-e-Hindal Wali Tum Ho, Khwaja ! Ham Ko Ajmer Apna Dikha Do

शाह-ए-हिन्दल-वली तुम हो, ख़्वाजा ! हम को अजमेर अपना दिखा दो

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी और हाफ़िज़ अहसन क़ादरी - लाइबा फ़ातिमाशायर: इमरान आजिज़उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़्वाजा ! मेरे ख़्वाजा !ख़्वाजा ! मेरे ख़्वाजा !

अब किरपा करो, ख़्वाजा ! मैं तुमरा भिकारी हूँया ख़्वाजा हसन ! तुमरी चौखट का सवाली हूँ

मुस्तफ़ा के प्यारे लाडले !ख़्वाजा ! हमें दर पे बुला ले

शाह-ए-हिन्दल-वली तुम हो, ख़्वाजा !हम को अजमेर अपना दिखा दोहम तुम्हारे भिकारी हैं, ख़्वाजा !चिश्तिया रंग अपना चढ़ा दो

ले के आए हैं कश्कोल ख़ालीतुमरे रौज़े पे सारे सवालीए मु'ईन-ए-जहाँ ! नूर-ए-हैदर !ज़िंदगी अब हमारी सजा दो

शाह-ए-हिन्दल-वली तुम हो, ख़्वाजा !हम को अजमेर अपना दिखा दोहम तुम्हारे भिकारी हैं, ख़्वाजा !चिश्तिया रंग अपना चढ़ा दो

तुम हो वलियों के राजा, ए हिन्दल-वली !तुम से फ़ैली है, ख़्वाजा ! यहाँ रौशनीहम को अजमेर बुलवा लो, ख़्वाजा सख़ी !दूर रह कर कटेगी न ये ज़िंदगी

शाह-ए-हिन्दल-वली तुम हो, ख़्वाजा !हम को अजमेर अपना दिखा दो

मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !

तुम 'अता-ए-रसूल-ए-ख़ुदा होहम ग़रीबों का तुम आसरा होसदक़ा पंज-तन का, संजर के वाली !मेरी बिगड़ी भी ख़्वाजा बना दो

शाह-ए-हिन्दल-वली तुम हो, ख़्वाजा !हम को अजमेर अपना दिखा दोहम तुम्हारे भिकारी हैं, ख़्वाजा !चिश्तिया रंग अपना चढ़ा दो

दर-ए-ख़्वाजा पे सवाली को खड़ा रहने दोसर नदामत से झुका है तो झुका रहने दो

ख़ुद ही फ़रमाएँगे मुजरिम पे वो रहमत की नज़रमुझ को ख़्वाजा की 'अदालत में खड़ा रहने दो

मुझ को मिल जाएगा सदक़ा, मैं चला जाऊँगाकासा-ए-दिल मेरा क़दमों में पड़ा रहने दो

सदक़ा पंज-तन का, संजर के वाली !मेरी बिगड़ी भी ख़्वाजा बना दो

मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !

मेरे इस दिल की चाहत है अजमेर मेंमेरी आँखों की सर्वत है अजमेर मेंदर्दमंदों की राहत है अजमेर मेंहम ग़रीबों की दौलत है अजमेर में

शाह-ए-हिन्दल-वली तुम हो, ख़्वाजा !हम को अजमेर अपना दिखा दोहम तुम्हारे भिकारी हैं, ख़्वाजा !चिश्तिया रंग अपना चढ़ा दो

ख़्वाजा उस्माँ हारूनी के प्यारे !ग़ौस-ए-आ'ज़म की आँखों के तारे !कर के नज़र-ए-करम मुझ पे, ख़्वाजा !मेरा सोया नसीबा जगा दो

शाह-ए-हिन्दल-वली तुम हो, ख़्वाजा !हम को अजमेर अपना दिखा दोहम तुम्हारे भिकारी हैं, ख़्वाजा !चिश्तिया रंग अपना चढ़ा दो

है ये इमरान 'आजिज़ तुम्हाराख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ अब ख़ुदा-राअपने दस्त-ए-'इनायत से, प्यारे !जाम-ए-उल्फ़त इसे भी पिला दो

शाह-ए-हिन्दल-वली तुम हो, ख़्वाजा !हम को अजमेर अपना दिखा दोहम तुम्हारे भिकारी हैं, ख़्वाजा !चिश्तिया रंग अपना चढ़ा दो

मुस्तफ़ा के प्यारे लाडले !ख़्वाजा ! हमें दर पे बुला ले

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