नात लिरिक्स

Shaah-e-Kaunain Ki Jis Shai Pe Nazar Ho Jaae

शाह-ए-कौनैन की जिस शय पे नज़र हो जाए

नात ख़्वान: इमरान अज़ीज़ मियाँशायर: पीर ग़ुलाम मुईनुल-हक़ गीलानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

शाह-ए-कौनैन की जिस शय पे नज़र हो जाएसंग-रेज़ा भी अगर हो तो गौहर हो जाए

मैं ये समझूँगा, मुझे दौलत-ए-कौनैन मिलीज़िंदगी गर दर-ए-अहमद पे बसर हो जाए

मेरी फ़रियाद में इतना तो असर हो जाएदिल जो तड़पे तो मुहम्मद को ख़बर हो जाए

हक़ ने बख़्शा है तसर्रुफ़ का शरफ़ आक़ा कोवो जो चाहें तो शब-ए-तार सहर हो जाए

एक हलकी सी तवज्जोह हो इधर भी आक़ाजो हैं जूया-ए-करम, उन पे नज़र हो जाए

इस से पहले कि मेरी अर्ज़ वहाँ तक पहुँचेमेरे अहवाल की आक़ा को ख़बर हो जाए

या नबी ! बख़्त-ए-सियाह मेरा फ़रोज़ाँ कर देसूरत-ए-ज़ेर जो है मिस्ल-ए-ज़बर हो जाए

लौट कर आए ब-फ़रमान-ए-नबी सूरज भीइक इशारे से ही दो-लख़्त क़मर हो जाए

ज़िंदगी शुक्र के सज्दों में गुज़र जाए, मु'ईन !एक मिस्रा' भी क़बूल उन को अगर हो जाए

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