नात लिरिक्स

Sata Rahi Hai Unhi Ki Yaadein, Hawa Bhi Naghma Suna Rahi Hai

सता रही है उन्ही की यादें, हवा भी नग़्मा सुना रही है

नात ख़्वान: दीदार हुसैनशायर: समी साक़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सता रही है उन्ही की यादें, हवा भी नग़्मा सुना रही हैदिखाएँ कैसे तड़प ये दिल की, मेरी सदाएँ बता रही है

न उन के जैसा हसीं है देखा, किसी बशर ने, किसी शजर नेज़मीं ज़मां ख़ाक उस शहर की उन्हीं की मिदहत सुना रही है

कभी हिरा में, कभी बदर में, कभी सफ़र में, कभी हज़र मेंक़ुरआन उन पर उतरता देखा, वहाँ की गलियाँ बता रही है

हाँ ! उस की ख़ातिर हजर भी बोले, उसी की ख़ातिर तना भी रो लेकैसा मुक़द्दर तेरा, हलीमा ! तू उन को झूला झुला रही है

हाँ ! ज़र्रा ज़र्रा सिसक रहा था, तेरी जुदाई में, शाह-ए-'आलम !सिद्दीक़, 'उमर और 'उस्मान-ओ-हैदर को ये जुदाई रुला रही है

कभी ज़ियारत जो उन की होगी, कभी मदीने गया जो साक़ीअदब से पलकें झुकाए कह देंगे ये जुदाई सता रही है

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