नात लिरिक्स

Sare Aalam Ki Matti Mein Jalwa-figan Jitne Zarre Hain Utne Durood Aap Par

सारे आलम की मट्टी में जल्वा-फ़िगन जितने ज़र्रे हैं उतने दुरूद आप पर

शायर: डॉ. अलीम उस्मानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सारे 'आलम की मट्टी में जल्वा-फ़िगन जितने ज़र्रे हैं उतने दुरूद आप परबाग़-ए-कौनैन के सारे अश्जार में जितने पत्ते हैं उतने दुरूद आप पर

चश्म-ए-इंसाँ से अश्कों के टपके हुए जितने क़तरे हैं उतने दुरूद आप परआसमाँ के दोशाले में टाँके हुए जितने तारे हैं उतने दुरूद आप पर

सारी तक़रीर-ओ-तहरीर-ए-इंसान में, रब्ब-ए-कौनैन के सारे क़ुरआन मेंजिस क़दर हर्फ़ हैं और हर हर्फ़ के जितने नुक़्ते हैं उतने दुरूद आप पर

ज़र्रा-ओ-आफ़ताब-ओ-मह-ओ-कहकशाँ, रंग-ए-रुख़्सार-ए-गुल हुस्न-ए-रू-ए-बुताँमेरे कहने का मतलब है तख़्लीक़ के जितने जल्वे हैं उतने दुरूद आप पर

ऐ 'अलीम ! अब ख़ुदा से ये फ़रियाद है, उस को मा'लूम 'इस्याँ की ता'दाद हैमेरे आ'माल-नामे के सफ़्हात पर जितने धब्बे हैं उतने दुरूद आप पर

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