नात लिरिक्स

Sarapa Sidq-o-Safa Ko Hussain Kehte Hain

सरापा सिद्क़-ओ-सफ़ा को हुसैन कहते हैं

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: शौक़ फ़रीदी इंडियाउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सलाम सलाम सलाम या हुसैन !सलाम सलाम सलाम या हुसैन !

ज़मीन-ओ-आसमान में हुसैन सा कोई नहींख़ुदा के इस जहान में हुसैन सा कोई नहीं

रिज़ा-ए-हक़ पे कर्बला में अपना सब लुटा दियाख़ुदा के इस जहान में हुसैन सा कोई नहीं

हुसैन सा कोई नहीं, हुसैन सा कोई नहींहुसैन सा कोई नहीं, हुसैन सा कोई नहीं

लिखेगा कौन इस तरह शहादतों की दास्ताँ ?किसी के ख़ानदान में हुसैन सा कोई नहीं

करेगा कौन सामना यज़ीद-ए-वक़्त का यहाँ ?हमारे दरमियान में हुसैन सा कोई नहीं

हुसैन सा कोई नहीं, हुसैन सा कोई नहींहुसैन सा कोई नहीं, हुसैन सा कोई नहीं

सरापा सिद्क़-ओ-सफ़ा को हुसैन कहते हैं'अता-ए-शेर-ए-ख़ुदा को हुसैन कहते हैं

हुसैनियत का ज़माने में होता है चर्चायज़ीदियत का निशाँ भी कहीं नहीं मिलताइसी लिए तो लगाते हैं अहल-ए-हक़ ना'राफ़ना यज़ीद, बक़ा को हुसैन कहते हैं

सरापा सिद्क़-ओ-सफ़ा को हुसैन कहते हैं'अता-ए-शेर-ए-ख़ुदा को हुसैन कहते हैं

सलाम या हुसैन ! सलाम या हुसैन !सलाम या हुसैन ! सलाम या हुसैन !

हुसैन नाम है शफ़क़त का, मेहरबानी काहुसैन नाम है जुरअत का, कामरानी कासबब हुसैन है बातिल की ना-तवानी कामुजाहिदों की सदा को हुसैन कहते हैं

सरापा सिद्क़-ओ-सफ़ा को हुसैन कहते हैं'अता-ए-शेर-ए-ख़ुदा को हुसैन कहते हैं

सलाम या हुसैन ! सलाम या हुसैन !सलाम या हुसैन ! सलाम या हुसैन !

नबी के दीन पे क़ुर्बां हुआ जवाँ बेटाशहीद हो गया क़र्बल में नन्हा शहज़ादामुसीबतों में भी करता रहा जो शुक्र-ए-ख़ुदाउसी ख़ुदा की रिज़ा को हुसैन कहते हैं

सरापा सिद्क़-ओ-सफ़ा को हुसैन कहते हैं'अता-ए-शेर-ए-ख़ुदा को हुसैन कहते हैं

सलाम या हुसैन ! सलाम या हुसैन !सलाम या हुसैन ! सलाम या हुसैन !

हुसैन दस्त-ए-जफ़ा को है तोड़ने वालाहुसैन नाता ख़ुदा से है जोड़ने वालाहुसैन सब्र की पोशाक ओढ़ने वालासिरात-ए-रुश्द-ओ-हुदा को हुसैन कहते हैं

सरापा सिद्क़-ओ-सफ़ा को हुसैन कहते हैं'अता-ए-शेर-ए-ख़ुदा को हुसैन कहते हैं

सलाम या हुसैन ! सलाम या हुसैन !सलाम या हुसैन ! सलाम या हुसैन !

हुसैनियत पे जो क़ाइम हैं बू-तुराबी हैंयही वो लोग हैं सच्चे हैं इंक़िलाबी हैंरगों में ख़ून हलाली है, ख़ानदानी हैंउन्हीं के राहनुमा को हुसैन कहते हैं

सरापा सिद्क़-ओ-सफ़ा को हुसैन कहते हैं'अता-ए-शेर-ए-ख़ुदा को हुसैन कहते हैं

सलाम या हुसैन ! सलाम या हुसैन !सलाम या हुसैन ! सलाम या हुसैन !

वो जिस का, शौक़-ए-फ़रीदी ! जहाँ में है चर्चावो जिस को सारे शहीदों का कहते हैं आक़ाजिसे कलाम-ए-ख़ुदा ने भी है कहा ज़िंदाइसी दवाम-ओ-बक़ा को हुसैन कहते हैं

सरापा सिद्क़-ओ-सफ़ा को हुसैन कहते हैं'अता-ए-शेर-ए-ख़ुदा को हुसैन कहते हैं

सलाम या हुसैन ! सलाम या हुसैन !सलाम या हुसैन ! सलाम या हुसैन !

सलाम सलाम सलाम या हुसैन !सलाम सलाम सलाम या हुसैन !

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