नात लिरिक्स

Sarapa Sabr-o-Wafa Ka Paikar | Hussain Jaisa Koi Nahin Hai

सरापा सब्र-ओ-वफ़ा का पैकर | हुसैन जैसा कोई नहीं है

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: मुहम्मद शौक़ीन नवाज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या इमाम-ए-हुसैन ! या इमाम-ए-हुसैन !या इमाम-ए-हुसैन ! या इमाम-ए-हुसैन !

लिबास है फटा हुवा, ग़ुबार में अटा हुवातमाम जिस्म-ए-नाज़नीं छिदा हुवा, कटा हुवाये कौन ज़ी-वक़ार है ! बला का शह-सवार है !कि है हज़ारों क़ातिलों के सामने डटा हुवा

ये बिल-यक़ीं हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन हैये बिल-यक़ीं हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है

दिलावरी में फ़र्द है, बड़ा ही शेर-मर्द हैकि जिस के दबदबे से रंग दुश्मनों का ज़र्द हैहबीब-ए-मुस्तफ़ा है ये, मुजाहिद-ए-ख़ुदा है येजभी तो इस के सामने ये फ़ौज गर्द-बर्द है

ये बिल-यक़ीं हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन हैये बिल-यक़ीं हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है

सरापा सब्र-ओ-वफ़ा का पैकर, हुसैन जैसा कोई नहीं हैसिपाह-ए-दीन-ए-नबी का अफ़सर, हुसैन जैसा कोई नहीं है

हुसैन जैसा कोई नहीं है, हुसैन जैसा कोई नहीं है

लिए हुए ज़ुल्फ़िक़ार-ए-हैदर, यज़ीदियत पर वो क़हर बन करहै बरसा मिस्ल-ए-जलाल-ए-हैदर, हुसैन जैसा कोई नहीं है

हुसैन जैसा कोई नहीं है, हुसैन जैसा कोई नहीं है

ये फ़र्द इक फ़र्द-ए-पंजतन है, लिबास हैदर का ज़ेब-ए-तन है'अली के जैसा है रन में तेवर, हुसैन जैसा कोई नहीं है

हुसैन जैसा कोई नहीं है, हुसैन जैसा कोई नहीं है

उधर सिपाह-ए-शाम है, हज़ार इंतिज़ाम हैउधर हैं दुश्मनान-ए-दीं, इधर फ़क़त इमाम हैमगर अजीब शान है, ग़ज़ब की आन-बान हैकि जिस तरफ़ उठी है तेग़ बस ख़ुदा का नाम है

'अबा भी तार तार है, तो जिस्म भी फ़िगार हैज़मीन भी तपी हुई, फ़लक भी शो'ला-बार हैमगर ये मर्द-ए-तेग़-ज़न, ये सफ़-शिकन, फ़लक-फ़िगनकमाल-ए-सब्र-ओ-तन-दही से महव-ए-कार-ज़ार है

ये बिल-यक़ीं हुसैन है, नबी का नूर-ए-'ऐन है

नबी का वा'दा वफ़ा किया है, नबी के दीं को बचा लिया हैलुटा के अकबर लुटा के असग़र, हुसैन जैसा कोई नहीं है

हुसैन जैसा कोई नहीं है, हुसैन जैसा कोई नहीं है

चला है मैदाँ में इब्न-ए-हैदर, लरज़ रहा है यज़ीदी लश्करयही सदा है हर इक ज़बाँ पर, हुसैन जैसा कोई नहीं है

हुसैन जैसा कोई नहीं है, हुसैन जैसा कोई नहीं है

निशाँ नहीं है यज़ीदियत का, हुसैनियत का है बोल-बालाहै बच्चा बच्चा गवाह इस पर, हुसैन जैसा कोई नहीं है

हुसैन जैसा कोई नहीं है, हुसैन जैसा कोई नहीं है

ख़ुदा का महबूब इस का नाना, जनाब-ए-हैदर है इस का बाबाहसन है इस का बड़ा बिरादर, हुसैन जैसा कोई नहीं है

या इमाम-ए-हुसैन ! या इमाम-ए-हुसैन !या इमाम-ए-हुसैन ! या इमाम-ए-हुसैन !

गवाही देता है दीं का लश्कर, हुसैन जैसा कोई नहीं हैहो चाहे रुस्तम कि या सिकंदर, हुसैन जैसा कोई नहीं है

कलाम-ए-रब्बी में ज़िक्र आया, शहीद ज़िंदा हुसैन ज़िंदातो बरमला हम कहें न क्यूँकर, हुसैन जैसा कोई नहीं है

हुसैन जैसा कोई नहीं है, हुसैन जैसा कोई नहीं है

तुम्हारा शौक़-ए-फ़रीदी, मौला ! ये ताहिर-ए-क़ादरी भी, मौला !पुकारेगा ता-क़याम-ए-महशर, हुसैन जैसा कोई नहीं है

हुसैन जैसा कोई नहीं है, हुसैन जैसा कोई नहीं है

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