नात लिरिक्स

Sarapa Khata Hoon Nigah-e-Karam Ho | Main Sab Se Bura Hoon Nigah-e-Karam Ho

सरापा ख़ता हूँ निगाह-ए-करम हो | मैं सब से बुरा हूँ निगाह-ए-करम हो

नात ख़्वान: मरग़ूब अहमद हमदानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सरापा ख़ता हूँ, निगाह-ए-करम होमैं सब से बुरा हूँ, निगाह-ए-करम हो

मुझे माँगने का सलीक़ा नहीं हैमगर माँगता हूँ, निगाह-ए-करम हो

मैं क्यूँ दर-ब-दर ठोकरें खाऊँ जा करमैं बे-आसरा हूँ, निगाह-ए-करम हो

कहाँ दर-ब-दर ठोकरें खाऊँ जा करतुम्हारा गदा हूँ, निगाह-ए-करम हो

हुज़ूर ! आप से आप को माँगता हूँफ़क़ीर आप का हूँ, निगाह-ए-करम हो

किसी और से मुझ को निस्बत नहीं हैमैं सिर्फ़ आप का हूँ, निगाह-ए-करम हो

मुनीर आप से और गुज़ारिश करूँ क्यायही चाहता हूँ, निगाह-ए-करम हो

मेरी दास्ताँ मुख़्तसर हो रही हैमैं बुझता दिया हूँ, निगाह-ए-करम हो

निगाह-ए-करम, ऐ पनाह-ए-दो-'आलम !अमाँ चाहता हूँ, निगाह-ए-करम हो

यक़ीनन तेरी रहमतों ने सँभालामैं जब भी गिरा हूँ, निगाह-ए-करम हो

तुम्हारी ही निस्बत है सरमाया मेरामैं सिर्फ़ आप का हूँ, निगाह-ए-करम हो

मुझे अपने क़दमों में बुलवा लो, आक़ा !करम, शाह-ए-वाला ! निगाह-ए-करम हो

'अता कीजिए हाज़री का क़रीनामदीने चला हूँ, निगाह-ए-करम हो

मुझे ख़्वाब-ए-ग़फ़लत से बेदार कर दोमैं सोया पड़ा हूँ, निगाह-ए-करम हो

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