नात लिरिक्स

Samne Seerat-e-Mustafa Dars Hai Rahbari Ke Liye

सामने सीरत-ए-मुस्तफ़ा दर्स है रहबरी के लिए

नात ख़्वान: मुहम्मद हुसैन रज़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सामने सीरत-ए-मुस्तफ़ा दर्स है रहबरी के लिएफिर हमें और क्या चाहिए, मोमिनो ! ज़िंदगी के लिए

कर यक़ीं तू मेरी बात पर, ऐसा होगा अँधेरा वो घरआ ही जाएँगे ख़ैर-उल-बशर, क़ब्र में रौशनी के लिए

हश्र में हम कहाँ तुम कहाँ, जब न होगा कोई मेहरबाँबन के रहमत हुज़ूर आएँगे, अपने हर उम्मती के लिए

हाथ आने को कुछ भी नहीं, बस मिलेगी ये दो गज़ ज़मींजाने फिर क्यूँ परेशान है आदमी आदमी के लिए

बाग़-ए-जन्नत की पुरवाइयाँ, सब्ज़ गुंबद की परछाइयाँकर चुका है ख़ुदा सब 'अता, अपने हर जन्नती के लिए

छोड़ दुनिया के सब रंज-ओ-ग़म, वो करेंगे निगाह-ए-करमतू ही, ऐ आसी-ए-बे-नवा ! जाएगा हाज़री के लिए

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।