स़ल्लू अ़लयहि व आलिहि स़ल्लू अ़लयहि व आलिहि
आए ग़म जिधर से उधर गएमेरे बिगड़े काम संवर गएमैंने जब ज़ुबान से ये कहा
स़ल्लू अ़लयहि व आलिहि स़ल्लू अ़लयहि व आलिहि
मैं था क्या, मुझे क्या बना दियामुझे इश्क़े-अहमद अता कियाहो भला हुज़ूर की आल का
स़ल्लू अ़लयहि व आलिहि स़ल्लू अ़लयहि व आलिहि
मरे जब सजन है यही दुआहो ज़ुबां पे या नबी मुस्तफ़ामेरे कफ़न पर हो लिखा हुवा
स़ल्लू अ़लयहि व आलिहि स़ल्लू अ़लयहि व आलिहि
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