नात लिरिक्स

Saleeqa To Nahin Lekin Aqeedat Kheench Laai Hai

सलीक़ा तो नहीं लेकिन अक़ीदत खींच लाई है

नात ख़्वान: सय्यिद इमरान मुस्तफ़ाशायर: डॉ. नदीम जीलानी 'दानिश'उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सलीक़ा तो नहीं लेकिन अक़ीदत खींच लाई हैमुझे इस बज़्म में उन की मोहब्बत खींच लाई है

सलीक़ा तो नहीं लेकिन अक़ीदत खींच लाई है

ये परवाना जिसे तहज़ीब-ए-हाज़िर के अँधेरों सेमुहम्मद नाम की शम्-'ए-हिदायत खींच लाई है

सलीक़ा तो नहीं लेकिन अक़ीदत खींच लाई है

बशर को पस्तियों से रिफ़'अत-ए-औज-ए-सुरय्या तकहुज़ूर-ए-पाक की चश्म-ए-'इनायत खींच लाई है

सलीक़ा तो नहीं लेकिन अक़ीदत खींच लाई है

करम के मुंतज़िर शाह-ओ-गदा दामन पसारे हैंशह-ए-कौनैन की सब को सख़ावत खींच लाई है

सलीक़ा तो नहीं लेकिन अक़ीदत खींच लाई है

है इक ख़ुश-कुन तसव्वुर आसियों की भीड़ से मुझ कोवही नज़र-ए-करम बहर-ए-शफ़ा'अत खींच लाई है

सलीक़ा तो नहीं लेकिन अक़ीदत खींच लाई है

मदीना हाज़री का ये शरफ़ यूँ ही नहीं मिलतातुम्हें, दानिश ! ख़ुदा की ख़ास रहमत खींच लाई है

सलीक़ा तो नहीं लेकिन अक़ीदत खींच लाई है

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