नात लिरिक्स

Salam Aye Do Jahan Ke Wali | Rasool-e-Makki Rasool-e-Madani

सलाम ऐ दो जहाँ के वाली | रसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी

नात ख़्वान: हुसैन नागरीशायर: अली मुहम्मद अल्वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अस्सलाम अस्सलाम अस्सलामअस्सलाम अस्सलाम अस्सलाम

सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली !रसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी !

सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली !

वो शाह हो या कोई गदागरग़ुलाम बनता तेरा वो आ करजो देख ले तेरी ख़ुश-ख़िसालीरसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी !

सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली !रसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी !

सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली !

फ़लक से आ'ला मक़ाम उस काजहाँ में रहता है नाम उस कातुम्हारे दर का है जो सवालीरसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी !

सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली !रसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी !

सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली !

अस्सलाम अस्सलाम अस्सलामअस्सलाम अस्सलाम अस्सलाम

तेरे ही दम से है शान-ओ-शौकततेरी ही ख़ातिर है सारी ख़िल्क़तवगरना 'आलम था ख़ाली ख़ालीरसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी !

सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली !रसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी !

सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली !

हमारी जानें फ़िदा हों उस परहमारी नज़रें फ़िदा हों उस परवो जिस ने देखी है कमली कालीरसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी !

सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली !रसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी !

सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली !

वसीला-ए-बीबी फ़ातिमा सेहमेशा, 'अल्वी ! जो माँगा मैं नेकभी न उस ने है बात टालीरसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी

सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली !रसूल-ए-मक्की रसूल-ए-मदनी !

सलाम, ऐ दो जहाँ के वाली !

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