नात लिरिक्स

Sahib-e-Taaj Wo, Shaah-e-Mea'raj Wo (Durood-e-Taaj | Lyrical Translation)

साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो (दुरूद-ए-ताज | मंज़ूम तर्जुमा)

नात ख़्वान: हूरिया फ़हीम - असद अत्तारीउपलब्ध: हिंदी

साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वोशह-सवार-ए-बुराक़-ओ-अमीर-ए-अ'लमदाफ़े-ए-हर-बला, दाफ़े-ए-हर-वबादाफ़े-ए-क़हत-ओ-अमराज़-ओ-रंज-ओ-अलम

साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो

इस्म लिखा गया, इस्म ऊँचा हुआइस्म मोहर-ए-क़बूल-ए-शफ़ाअ'त भी हैइस्म की बरकतें, इस्म की रौनक़ेंइस्म लोह-ओ-क़लम की अमानत भी है

क्या अ'रब ! क्या अ'जम ! सब के सरदार हैंसब के सरदार का है मुक़द्दस बदनहरम-ओ-का'बा को वो जो मुनव्वर करेवो महकती, वो पाकीज़ा सी इक किरन

साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो

चाश्त-गाहों का सूरज वजूद आप काआप हर शब की ज़ुल्मत के माहताब हैंसदर बज़्म-ए-बुलंदी-ओ-रिफ़अ'त के हैंराह-गुज़ार-ए-हिदायत के माहताब हैं

सारी मख़्लूक़ की हैं वो जा-ए-अमाँसारी तारीकियों के वो रौशन चराग़नेक तीनत हैं वो, नेक अतवार हैंउन के हाथों में है बख़्शिशों के अयाग़

साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो

सर से पैरों तलक वो करम ही करमरब हिफ़ाज़त करे बिल-यक़ीं आप कीउन के ख़िदमत-गुज़ारों में जिब्रील हैऔर सवारी बुराक़-ए-हसीं आप की

सफ़र उन का है मेअ'राज और सिद्रतुल-मुंतहा मुस्तक़र और मक़ाम उन का हैक़ाब क़ौसेन का मर्तबा उन का मतलूब-है और दारु-स्सलाम उन का है

साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो

और मतलूब ही उन का मक़्सूद हैऔर मक़्सूद ही उन का मौजूद हैआप सारे रसूलों के सरदार हैंआप का सिर्फ़ अल्लाह मअ'बूद है

बा'द में सारे नबियों के आए हैं वोबख़्शवाएँगे हर इक गुनाहगार कोहर मुसाफ़िर की करते हैं ग़म-ख़्वारियाँरहमतें बाँटते हैं वो संसार को

साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो

आशिक़ों के दिलों की वो तस्कीन हैंऔर मुरादें हर इक साहिब-ए-शौक़ कीहक़-शनासों के ख़ुर्शीद-ओ-ख़ावर हैं वोसालिकीन-ए-रह-ए-इश्क़ की रौशनी

प्यार मोहताज-ओ-मुफ़्लिस से, मिस्कीन सेहर मुक़र्रिब की वो रह-नुमाई करेंजिन्न-ओ-इंसाँ के सरदार, दोनों हरम-दोनों क़िबलों की वो पेशवाई करें

साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो

दुनिया और आख़िरत का वसीला हैं वोरुत्बा-ए-क़ाब-क़ौसेन जिन को मिलादोनों ही मश्रिक़ों मग़रिबों का वो रबहासिल उन को ख़िताब उस के महबूब का

जद्द-ए-अमजद हैं हसनैन के और हर-जिन्न-ओ-इंसाँ के आक़ा-ओ-मौला हैं वोबाप क़ासिम के, बेटे हैं अब्दुल्लाह केऔर नूर-ए-इलाही का हिस्सा हैं वो

साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो

ए फ़िदायान-ए-नूर-ए-जमाल-ए-नबी !आप पर, आल-ओ-असहाब पर सुब्ह-ओ-शामजैसे हक़ भेजने का है भेजो ब-सद-एहतिराम-ओ-मोहब्बत दुरूद-ओ-सलाम

साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वोशह-सवार-ए-बुराक़-ओ-अमीर-ए-अ'लमदाफ़े-ए-हर-बला, दाफ़े-ए-हर-वबादाफ़े-ए-क़हत-ओ-अमराज़-ओ-रंज-ओ-अलम

साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।