नात लिरिक्स

Sabhi Dukh Mitati Hai Maa | Bahut Yaad Aati Hai Maa

सभी दुख मिटाती है माँ | बहुत याद आती है माँ

शायर: अर्क़म हसनपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सभी दुख मिटाती है माँ, बहुत याद आती है माँसभी दुख मिटाती है माँ, बहुत याद आती है माँ

मैं हूँ कौन मुझ को बताया था माँ नेमुझे पहला कलमा पढ़ाया था माँ नेवो ये चाहती थी कि मैं सीख जाऊँकि पढ़ पढ़ के क़ुरआँ सुनाया था माँ नेख़ुदा से मिलाती है माँ, बहुत याद आती है माँ

वो हाथों से अपने खिलाती थी मुझ कोकभी लोरियाँ भी सुनाती थी मुझ कोये कह कर कि तू थक गया मेरे बेटेकभी दूध मीठा पिलाती थी मुझ कोथपक कर सुलाती है माँ, बहुत याद आती है माँ

वो बचपन के दिन अब नहीं आने वालेबहुत खेलते थे अँधेरे उजालेमैं अब सोचता हूँ कि पैरों में मेरेवो ममता की ज़जीर अब कौन डालेगली से बुलाती है माँ, बहुत याद आती है माँ

इलाही ! क़ुबूल अब ये मेरी दु'आ करमेरी नेकियाँ मेरी माँ को 'अता करमेरी माँ को तू बख़्श दे, मेरे मौला !कि जन्नत में रखना तू रानी बना करमुझे अब रुलाती है माँ, बहुत याद आती है माँ

वो माथा मेरा प्यार से चूमती हैकि अब चाँद जैसी बहू ढूँढती हैमेरे घर को जन्नत बनाने को, अर्क़म !यहाँ दर-ब-दर, कू-ब-कू घूमती हैकि सेहरा सजाती है माँ, बहुत याद आती है माँ

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