नात लिरिक्स

Saba Madine Mein Mustafa Se Hum Bekason Ka Salam Kehna

सबा मदीने में मुस्तफ़ा से हम बेकसों का सलाम कहना

नात ख़्वान: उस्ताद बहाउद्दीन ख़ान क़व्वालउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सबा ! मदीने में मुस्तफ़ा से हम बेकसों का सलाम कहनानहीं है कोई ब-जुज़ तुम्हारे, हमारा इतना पयाम कहना

सबा ! मदीने में मुस्तफ़ा से हम बेकसों का सलाम कहना

मैं पा-प्यादा हूँ, या मुहम्मद ! सँभाल लीजे सँभाल लीजेब-जुज़ तुम्हारे किसे पुकारे तुम्हारा अदना ग़ुलाम कहना

सबा ! मदीने में मुस्तफ़ा से हम बेकसों का सलाम कहना

जगह मदीने में वो 'अता हो, तुम्हारे रौज़े का सामना होवहीं पे रहने की आरज़ू है, वहीं का मुझ को ग़ुलाम कहना

सबा ! मदीने में मुस्तफ़ा से हम बेकसों का सलाम कहना

न मर रहे हैं, न जी रहे हैं, तड़प रहे हैं, सिसक रहे हैंनहीं हैं ज़िंदा मगर हैं ज़िंदा, तुम्हारा ले ले के नाम कहना

सबा ! मदीने में मुस्तफ़ा से हम बेकसों का सलाम कहना

फ़िदा मैं तेरे, निसार तेरे, तेरे मैं सदक़े, तेरे मैं क़ुर्बांगुज़र रही है जो हम पे हालत, सबा ! नबी से तमाम कहना

सबा ! मदीने में मुस्तफ़ा से हम बेकसों का सलाम कहना

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