नात लिरिक्स

Sab Ko Udas Kar Ke Ramzan Ja Raha Hai

सब को उदास कर के रमज़ान जा रहा है

उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सब को उदास कर के रमज़ान जा रहा हैसब पे लुटा के अपना फ़ैज़ान जा रहा है

आया था घर हमारे, क़िस्मत हमारी बन केभेजा था जो ख़ुदा ने, वो मेहमान जा रहा है

क़िस्मत से मिल गया था रमज़ान का महीनादिल रो पड़ा है जब ये रमज़ान जा रहा है

बख़्शिश का ज़रिया' बन के रमज़ान आ गया थाबख़्शिश लुटा के सब पे रमज़ान जा रहा है

नशीद-ख़्वाँ:नाज़िम रज़ा मज़हरीयास्मीन ख़ान

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