नात लिरिक्स

Sab Ke Hajat rawa Ghareeb Nawaz | Har Maraz Ki Shifa Ghareeb Nawaz

सब के हाजत-रवा ग़रीब-नवाज़ | हर मरज़ की शिफ़ा ग़रीब-नवाज़

नात ख़्वान: सय्यिद मोईनुद्दीन चिश्तीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सब के हाजत-रवा ग़रीब-नवाज़हर मरज़ की शिफ़ा ग़रीब-नवाज़

ग़मज़दों ने कहा ग़रीब-नवाज़बेकसों की सदा ग़रीब-नवाज़

सब के हाजत-रवा ग़रीब-नवाज़हर मरज़ की शिफ़ा ग़रीब-नवाज़

हर वो साइल मुराद पाता हैजो भी कहता है या ग़रीब-नवाज़

सब के हाजत-रवा ग़रीब-नवाज़हर मरज़ की शिफ़ा ग़रीब-नवाज़

तेरे दर पर जबीं झुकाते हैंहिन्द के औलिया ग़रीब-नवाज़

सब के हाजत-रवा ग़रीब-नवाज़हर मरज़ की शिफ़ा ग़रीब-नवाज़

जिन का कोई नहीं ज़माने मेंउन का है आसरा ग़रीब-नवाज़

सब के हाजत-रवा ग़रीब-नवाज़हर मरज़ की शिफ़ा ग़रीब-नवाज़

ख़ाक-ए-अजमेर ख़ूब है, ख़ाकी !चूम ले कह के या ग़रीब-नवाज़

सब के हाजत-रवा ग़रीब-नवाज़हर मरज़ की शिफ़ा ग़रीब-नवाज़

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