नात लिरिक्स

Sab Gadaon Ke Wo Dastagir Hain | Ghaus-e-Azam To Peeron Ke Peer Hain

सब गदाओं के वो दस्त-गीर हैं | ग़ौस-ए-आज़म तो पीरों के पीर हैं

नात ख़्वान: उमैर ज़ुबैरशायर: सुहैल कलीम फ़ारूक़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सब गदाओं के वो दस्त-गीर हैंग़ौस-ए-आ'ज़म तो पीरों के पीर हैं

क्यूँ ग़ैर का रंग अपनाएँ, लोगो !दर दर पे जाएँ तो क्यूँ जाएँ, लोगो !हम तो जीलानी दर के फ़क़ीर हैंग़ौस-ए-आ'ज़म तो पीरों के पीर हैं

मीराँ की नगरी के हैं जो गदागरदुनिया में रहते हैं वो सर उठा करवो अमीरों से बढ़ कर अमीर हैंग़ौस-ए-आ'ज़म तो पीरों के पीर हैं

कहता हूँ दुश्मन से, सर को झुका लेमीराँ बचा लेंगे, तू आज़मा लेतेरे तरकश में जितने भी तीर हैंग़ौस-ए-आ'ज़म तो पीरों के पीर हैं

मीराँ की 'अज़मत वो ही जानते हैंमीराँ को रहबर वो ही मानते हैंजिन के, फ़ारूक़ी ! ज़िंदा ज़मीर हैंग़ौस-ए-आ'ज़म तो पीरों के पीर हैं

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