नात लिरिक्स

Saare Jahan Se Achchha Hindostan Hamara (Tarana-e-Hindi)

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा (तराना-ए-हिन्दी)

शायर: अल्लामा डॉ. इक़बालउपलब्ध: हिंदी

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमाराहम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा

ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन मेंसमझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा

पर्बत वो सब से ऊँचा हम-साया आसमाँ कावो संतरी हमारा वो पासबाँ हमारा

गोदी में खेलती हैं इस की हज़ारों नदियाँगुलशन है जिन के दम से रश्क-ए-जिनाँ हमारा

ऐ आब-रूद-ए-गंगा वो दिन है याद तुझ कोउतरा तेरे किनारे जब कारवाँ हमारा

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखनाहिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा

यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा सब मिट गए जहाँ सेअब तक मगर है बाक़ी नाम-ओ-निशाँ हमारा

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारीसदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा

इक़बाल कोई महरम अपना नहीं जहाँ मेंमालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहाँ हमारा

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