नात लिरिक्स

Rasool-e-Pak Ke Shaida Mere Farooq-e-Azam Hain

रसूल-ए-पाक के शैदा मेरे फ़ारूक़-ए-आज़म हैं

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: मुहम्मद शौक़ीन नवाज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सलामन या अमीर-अल-मोमिनीन !सलामन या ख़लीफ़तुल-मुस्लिमीन !सलामन या 'उमर अल-फ़ारूक़ !सलामन या 'उमर अल-फ़ारूक़ !

अमीरुल-मोमिनीन फ़ारूक़-ए-आ'ज़म !अमीरुल-मोमिनीन फ़ारूक़-ए-आ'ज़म !

रसूल-ए-पाक के शैदा मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैंहै जिन का 'अर्श पर चर्चा, मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

रसूल-ए-पाक के शैदा मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

बाक़ी है तेरे नाम की तौक़ीर अभी तकफैली है तेरे 'अद्ल की तनवीर अभी तक

ऐ हज़रत-ए-फ़ारूक़ वज़ीर-ए-शह-ए-कौनैन !है क़ाफ़िला-ए-'इश्क़ का तू मीर अभी तक

डरते हैं तेरे नाम से शैतान के चेलेहै तेरे ग़ज़ब में वही तासीर अभी तक

गुस्ताख़-ए-नबी आज तलक काँप रहे हैंगर्दन नहीं भूली तेरी शमशीर अभी तक

ज़ालिम के कलेजे हैं तेरे 'अद्ल से लर्ज़ांहै ज़ुल्म के सीने में तेरा तीर अभी तक

इस्लाम की तहज़ीब को घेरे हैं यज़ीदीकर्बल में हैं इस वक़्त के शब्बीर अभी तक

तुम ने जो लगाया था कभी बद्र-ओ-उहुद मेंहै गूँजता वो ना'रा-ए-तकबीर अभी तक

ना'रा-ए-तकबीर !अल्लाहु अकबर ! अल्लाहु अकबर !

अस्सलाम अस्सलाम इमाम-ए-'आदिल !अस्सलाम अस्सलाम इमाम-ए-'आदिल !

ऐवान-ए-अदालत पे त'अस्सुब का है क़ब्ज़ाइंसाफ़ के दफ़्तर में है ताख़ीर अभी तक

ईसार-ओ-शुजा'अत के गौहर प्यारे 'उमर हैंवो नाम है ए'ज़ाज़ की ता'बीर अभी तक

जन्नत की बशारत उन्हें सरकार ने बख़्शीहर सम्त चमकती है वो तबशीर अभी तक

है ज़ात-ए-'उमर आ'दल-ए-असहाब, फ़रीदी !बेशक वो हैं इक मीर-ए-जहाँगीर अभी तक

वो जिन पर बू-बकर की भी सदाक़त नाज़ करती थीवो जिन पर मेरे 'उस्माँ की सख़ावत नाज़ करती थी'अली शेर-ए-ख़ुदा की जिन पे क़ुव्वत नाज़ करती थीवो फ़ख़्र-ए-सय्यिद-ए-बतहा मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

है जिन का 'अर्श पर चर्चा, मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

रसूल-ए-पाक के शैदा मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

सहाबी हो 'उमर जैसा, ख़लीफ़ा हो 'उमर जैसाजहाँ पे हुक्मरानी का तरीक़ा हो 'उमर जैसाज़माना अब न देखेगा कोई भी हुक्मराँ ऐसाजो 'आदिल हो 'उमर जैसा, जो सच्चा हो 'उमर जैसा

अमीरुल-मोमिनीन फ़ारूक़-ए-आ'ज़म !अमीरुल-मोमिनीन फ़ारूक़-ए-आ'ज़म !

जलाली थे, नबी के 'इश्क़ में सरशार रहते थेजिधर से भी गुज़रते थे शयातीं भाग जाते थेमुनाफ़िक़ नाम सुनते थे तो डर से काँप जाते थेथा ऐसा दबदबा जिन का, मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

है जिन का 'अर्श पर चर्चा, मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

रसूल-ए-पाक के शैदा मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

समझ आता नहीं कैसे बताऊँ मर्तबा उन काबुलाते थे जिन्हें फ़ारूक़ कह कर सय्यिद-ए-बतहाजिन्हें सिद्दीक़-ए-अकबर ने बनाया जा-नशीं अपनामिला जिन को नसीब ऐसा, मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

है जिन का 'अर्श पर चर्चा, मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

रसूल-ए-पाक के शैदा मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

जो, ऐ शौक़-ए-फ़रीदी ! मुस्तफ़ा के दिल की हैं चाहतशहंशाह-ए-अदालत हैं, ख़ुदा की ख़ास हैं ने'मतनबी के 'आशिक़ों के वास्ते अल्लाह की हैं रहमतमुराद-ए-सरवर-ए-बतहा मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

है जिन का 'अर्श पर चर्चा, मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

रसूल-ए-पाक के शैदा मेरे फ़ारूक़-ए-आ'ज़म हैं

अमीरुल-मोमिनीन फ़ारूक़-ए-आ'ज़म !अमीरुल-मोमिनीन फ़ारूक़-ए-आ'ज़म !

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