नात लिरिक्स

Ramzan Ke Jaisa Hamein Tohfa Na Milega

रमज़ान के जैसा हमें तोहफ़ा न मिलेगा

शायर: हमदमउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रमज़ान के जैसा हमें तोहफ़ा न मिलेगाऐसा कभी अच्छा हमें मौक़ा' न मिलेगा

इस माह में नाज़िल हुआ क़ुरआन-ए-मुक़द्दसइस से हमें बेहतर कोई हदिया न मिलेगा

अफ़लाक के दर खुल गए रमज़ाँ के सबब सेइस जैसा किसी माह को रुत्बा न मिलेगा

आती है सदा, मोमिनो ! तय्यारियाँ कर लोइस माह के जैसा हमें दर्जा न मिलेगा

साइम के लिए खुल गया रय्यान अलग सेइस दर में किसी ग़ैर को हिस्सा न मिलेगा

अल्लाह ने रमज़ान को ज़ीशान बनायाइस से हमें बेहतर कोई उस्वा न मिलेगा

क़ुरआँ की तिलावत से निखर जाएगी सीरतइस जैसा जहाँ में हमें ख़ुत्बा न मिलेगा

हर शब है अनोखी मह-ए-रमज़ान की वल्लाहऐसा किसी सा'अत कभी इजरा न मिलेगा

पैग़ाम-ए-मुसर्रत है ये बख़्शिश का महीनाबख़्शिश का हमें ऐसा ये तोशा न मिलेगा

इस माह-ए-मुक़द्दस में करो दिल से 'इबादतहमदम ! कोई इस से भला रस्ता न मिलेगा

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