नात लिरिक्स

Peeran-e-Peer Lajpal Meeran

पीरान-ए-पीर लजपाल मीराँ

नात ख़्वान: हाजी बिलाल रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ !नूर-ए-नबी, मुस्तफ़ा के लाल मीराँ !

ख़ाक-ए-क़दम का मैं सुरमा बनाऊँराह में तुमरी मैं पलकें बिछाऊँमहबूब-ए-रब्ब-ए-ज़ुल-जलाल मीराँ !

पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ !नूर-ए-नबी, मुस्तफ़ा के लाल मीराँ !

बुढ़िया की हसरत को तुम ने मिटायाबिछड़े पिसर से उसे फिर मिलायाडूबी हुई कश्ती दी निकाल, मीराँ !

पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ !नूर-ए-नबी, मुस्तफ़ा के लाल मीराँ !

सर पे विलायत का है ताज आ'लानूर-ए-नबी का है काँधे पे दोशालापंज-तनी रुख़ पे है जमाल, मीराँ !

पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ !नूर-ए-नबी, मुस्तफ़ा के लाल मीराँ !

क़ादरी सख़ावत के चर्चे बड़े हैंग़ौस-ओ-क़ुतुब हाथ बाँधे खड़े हैंकर रहे हैं सब को माला-माल मीराँ

पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ !नूर-ए-नबी, मुस्तफ़ा के लाल मीराँ !

वलियों ने क़दमों में गर्दन झुकाईसाया-फ़िगन तुम पे है मुस्तफ़ाईआप की नहीं कोई मिसाल, मीराँ

पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ !नूर-ए-नबी, मुस्तफ़ा के लाल मीराँ !

'आसी के दिल को मदीना बना दोनूर-ए-मुहम्मद के जल्वे बसा दोकर दो करम, पीर-ए-बा-कमाल मीराँ !

पीरान-ए-पीर लज-पाल मीराँ !नूर-ए-नबी, मुस्तफ़ा के लाल मीराँ !

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