नात लिरिक्स

Pandra Sau Sala Jashn-e-Wiladat Pyare Nabi Ka Mil Ke Manayein

पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँ

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: शौक़ फ़रीदी इंडियाउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँ

घर घर सजाएँगे, ख़ुशियाँ मनाएँगेआक़ा से प्यार है सब को बताएँगे

पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँपंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँ

आ गए जग में शाह-ए-मदीना, नूर भरा है प्यारा महीनाछोड़ के सारे काम, दिवानो ! आओ नबी की बज़्म सजाएँ

आमिना की जान, बारहवीं का चाँदनूर बन के आया, हर लब है मुस्कुराया

पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँपंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँ

आए हैं आक़ा कलमा पढ़ाने, राह-ए-हिदायत हम को दिखानेउन की विलादत फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा है, क्यूँ न मनाएँ क्यूँ न मनाएँ

आमिना की जान, बारहवीं का चाँदनूर बन के आया, हर लब है मुस्कुराया

पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँपंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँ

आए मेरे मुस्तफ़ा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !आज है सब की सदा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !अब्र-ए-करम छा गया ! मरहबा या मुस्तफ़ा !नूर वाला आ गया ! मरहबा या मुस्तफ़ा !

जश्न-ए-विलादत शाह-ए-ज़मन का, 'इश्क़ है वल्लाह अहल-ए-सुनन काझंडे लगा कर, घर को सजा कर, आओ नबी की ना'त सुनाएँ

आमिना की जान, बारहवीं का चाँदनूर बन के आया, हर लब है मुस्कुराया

पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँपंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँ

सदियों से जारी है ये रिवायत, जश्न-ए-नबी है सुन्नी सक़ाफ़तथाम के परचम प्यारे नबी का, अपने मिशन को आगे बढ़ाएँ

आमिना की जान, बारहवीं का चाँदनूर बन के आया, हर लब है मुस्कुराया

पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँपंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँ

उन की सना से दिल है मुनव्वर, आँख है रौशन रूह मुअ'त्तरना'त-ए-नबी से, शौक़-ए-फ़रीदी ! अपना मुक़द्दर क्यूँ न जगाएँ

आमिना की जान, बारहवीं का चाँदनूर बन के आया, हर लब है मुस्कुराया

पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँपंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत प्यारे नबी का मिल के मनाएँ

आए मेरे मुस्तफ़ा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !आज है सब की सदा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !अब्र-ए-करम छा गया ! मरहबा या मुस्तफ़ा !नूर वाला आ गया ! मरहबा या मुस्तफ़ा !

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