नात लिरिक्स

Palestineo Ne Qayamat Mein Aaqa Ko Dukhda Sunaya To Phir Kya Karoge

फ़िलिस्तीनियों ने क़यामत में आक़ा को दुखड़ा सुनाया तो फिर क्या करोगे

शायर: सय्यिद अहमदुल्लाह शाह रिफ़ाईउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

फ़िलिस्तीनियों ने क़यामत में आक़ा को दुखड़ा सुनाया तो फिर क्या करोगेअगर मुस्तफ़ा ने भी नाराज़ हो कर रुख अपना फिराया तो फिर क्या करोगे

फ़िलिस्तीनियों ने क़यामत में आक़ा को दुखड़ा सुनाया तो फिर क्या करोगे

उड़ी जा रही हैं शहीदों की लाशें फ़ुग़ाँ बन के 'अर्श-ए-इलाही की जानिबअगर ये मनाज़िर तुम्हारे घरों में ख़ुदा ने दिखाया तो फिर क्या करोगे

फ़िलिस्तीनियों ने क़यामत में आक़ा को दुखड़ा सुनाया तो फिर क्या करोगे

जो तुम खा रहे हो ये लाशें हैं उन की, जो तुम पी रहे हो ये सब ख़ूँ है उन काख़ुदा के लिए अपना ईमाँ बचा लो, अगर वक़्त गुज़रा तो फिर क्या करोगे

फ़िलिस्तीनियों ने क़यामत में आक़ा को दुखड़ा सुनाया तो फिर क्या करोगे

जो कर्बल की तारीख़ सुन कर ये कहते हो ऐ काश ! हम उस ज़माने में होतेतुम्हीं को क़यामत में ग़ज़ा के बच्चों ने चेहरा दिखाया तो फिर क्या करोगे

फ़िलिस्तीनियों ने क़यामत में आक़ा को दुखड़ा सुनाया तो फिर क्या करोगे

हमारा ही क़िब्ला है बैत-उल-मुक़द्दस, हमारे ही नबियों की आरामगाह हैअगर उन में तुम को किसी एक ने भी किया गर पराया तो फिर क्या करोगे

फ़िलिस्तीनियों ने क़यामत में आक़ा को दुखड़ा सुनाया तो फिर क्या करोगे

दु'आओं से उन की मदद करते रहना, न सय्यद रिफ़ाई ! उन्हें भूल जानायही एक मौक़ा' है मआ'फ़ी का अपनी, जो ये भी गवाया तो फिर क्या करोगे

फ़िलिस्तीनियों ने क़यामत में आक़ा को दुखड़ा सुनाया तो फिर क्या करोगे

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