नात लिरिक्स

Paikar-e-Sabr-o-Raza, Baadshaah-e-Karbala, Wo Husain Ibn-e-Ali

पैकर-ए-सब्र-ओ-रज़ा, बादशाह-ए-कर्बला, वो हुसैन इब्न-ए-अली

नात ख़्वान: ताहिर रज़ा रामपुरीशायर: ताहिर रज़ा रामपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

फ़ातिमा का लाडला, जो 'अली के घर पलावो हुसैन इब्न-ए-'अलीपैकर-ए-सब्र-ओ-रज़ा, बादशाह-ए-कर्बलावो हुसैन इब्न-ए-'अली

कौन है सरदार-ए-जन्नत ? किस के नाना हैं नबी ?किस की माँ है फ़ातिमा, भाई हसन, बाबा 'अली ?लाए थे किस के लिए जिब्रील कपड़े जन्नतीवो हुसैन इब्न-ए-'अली

पैकर-ए-सब्र-ओ-रज़ा, बादशाह-ए-कर्बलावो हुसैन इब्न-ए-'अली

है मेरी आँखों की ठंडक, है मेरे इस दिल का चैनमैं हुसैन इब्न-ए-'अली से हूँ तो मुझ से है हुसैनज़ालिमों क्या भूल बैठे ये हदीस-ए-पाक भी !वो हुसैन इब्न-ए-'अली

पैकर-ए-सब्र-ओ-रज़ा, बादशाह-ए-कर्बलावो हुसैन इब्न-ए-'अली

सज्दे को लम्बा करें सरकार जिन के वास्तेजिन को काँधों पर बिठा कर तय कराएँ रास्तेचूमते रहते हों जिन को हर घड़ी प्यारे नबीवो हुसैन इब्न-ए-'अली

पैकर-ए-सब्र-ओ-रज़ा, बादशाह-ए-कर्बलावो हुसैन इब्न-ए-'अली

अपने नाना का मदीना, माँ की तुर्बत छोड़ दीएक वा'दे के लिए जीने की चाहत छोड़ दीआज तक उन की तरह, आया न आएगा कोईवो हुसैन इब्न-ए-'अली

पैकर-ए-सब्र-ओ-रज़ा, बादशाह-ए-कर्बलावो हुसैन इब्न-ए-'अली

जिन के बाज़ूओं की ताक़त हो 'अली शेर-ए-ख़ुदाकर गई हो परवरिश जिन की जनाब-ए-फ़ातिमाकौन उन से छीन पाए ज़ुल्फ़िक़ार-ए-हैदरीवो हुसैन इब्न-ए-'अली

पैकर-ए-सब्र-ओ-रज़ा, बादशाह-ए-कर्बलावो हुसैन इब्न-ए-'अली

हँस के अकबर की जवानी को लुटा कर दीन परकर के क़ुर्बां गोद में छेह माह का नन्हा जिगरदीन-ए-पाक-ए-मुस्तफ़ा को दे रहे हैं ज़िंदगीवो हुसैन इब्न-ए-'अली

पैकर-ए-सब्र-ओ-रज़ा, बादशाह-ए-कर्बलावो हुसैन इब्न-ए-'अली

जिन के बाज़ूओं की ताक़त हो 'अली शेर-ए-ख़ुदाकर गई हो परवरिश जिन की जनाब-ए-फ़ातिमाताहिर ! उन के हौसलों पर है फ़िदा ख़ुद मौत भीवो हुसैन इब्न-ए-'अली

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