नात लिरिक्स

Har Qadam Par Bichhe Ho Farishton Ke Par

हर क़दम पर बिछे हों फ़रिश्तों के पर

नात ख़्वान: ताहिर रज़ा रामपुरीशायर: ताहिर रज़ा रामपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हर क़दम पर बिछे हों फ़रिश्तों के परऐसी राह-गुज़र चाहिए तो बता'इश्क़ कहता है महबूब-ए-रब का यहीजन्नती हम-सफ़र चाहिए तो बता

अपने महबूब से ये ख़ुदा ने कहाजैसा चाहेगा तू, वैसा हो जाएगाघर से निकला है जो जान लेने तेरीसर-ब-ख़म वो 'उमर चाहिए तो बता

पूछा, मिट्टी का तुम ये बनाते हो क्या ?तो ज़ुबैदा से बहलोल ने ये कहाइस को क्या देखना क्या बनाता हूँ मैंतुझ को जन्नत में घर चाहिए तो बता

ज़ोर-ए-बै'अत है, कर्बल का मैदान हैऔर हुसैन इब्न-ए-हैदर का ए'लान हैहाथ तो तेरे हाथों में देंगे नहींहाँ, अगर तुझ को सर चाहिए तो बता

उन की रहमत की हद का त'अय्युन न करउन की शान-ए-करीमी है बस मो'तबरऐ गुनहगार ! महशर में तुझ को अगरबख़्शिशों की नज़र चाहिए तो बता

ये हर इक उम्मती से, गुनहगार सेऔर, ताहिर ! नबी के तलबगार सेकह रहा है वसीला ये सरकार काकि दु'आ में असर चाहिए तो बता

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