नात लिरिक्स

Le Ke Aasmani Wo Kitab Aa Gaye

ले के आसमानी वो किताब आ गए

नात ख़्वान: ताहिर रज़ा रामपुरीशायर: ताहिर रज़ा रामपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ले के आसमानी वो किताब आ गएकुफ़्र के सवालों का जवाब आ गए

नूर नूर हो गया है, आ गए हैं नूरचूर चूर हो गया है कुफ़्र का ग़ुरूरआमिना की गोद में जब आ गए हुज़ूरउन के साथ कितने इंक़िलाब आ गएले के आसमानी वो किताब आ गए

हर चमन की जान हैं, बहार हैं नबीताजदारों के भी ताजदार हैं नबीसारे बे-क़रारों के क़रार हैं नबीबन के वो ज़मीं के माहताब आ गएले के आसमानी वो किताब आ गए

दोनों 'आलम का नगीना याद आ गयाया'नी वो जान-ए-मदीना याद आ गयामुझ को आक़ा का पसीना याद आ गयाजब भी मेरे सामने गुलाब आ गएले के आसमानी वो किताब आ गए

उन की रहमतों का न हिसाब है कोईवर्ना इतने इतने गुनहगार उम्मतीलाज हम ग़ुलामों की बचाए हैं नबीउम्मतों पे कितनों की 'अज़ाब आ गएले के आसमानी वो किताब आ गए

किस में दम है, ताहिर ! उन को देख पाने काउस सरापा नूर से नज़रें मिलाने काया'नी कि क़रीब से क़रीब आने कामेरे मुस्तफ़ा जो बे-हिजाब आ गएले के आसमानी वो किताब आ गए

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