नात लिरिक्स

Noor Wale Aaqa Ka Jashn e Wiladat Aaya Hai

नूर वाले आक़ा का जश्ने-विलादत आया है

शायर: मुहम्मद अफ़ज़ल अत्तारी क़ादरीउपलब्ध: हिंदी

नूर वाले आक़ा का जश्ने-विलादत आया हैजिनके आने से सारे आलम में नूर छाया है

नूर वाले आक़ा का जश्ने-विलादत आया है

साया जिनका ना किसीको नज़र आया उम्र भरये भी सच है के जहाँ भर में उन्हीं का साया है

नूर वाले आक़ा का जश्ने-विलादत आया है

कह गए हैं मेरे हादी, सुनलो ला-नबीया बाअ़दीहै मेरा ईमान, उन सा आएगा न आया है

नूर वाले आक़ा का जश्ने-विलादत आया है

मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा

जल गया शैतान, आशिक़ झूम उठा, ख़ुश हो गयाया रसूलल्लाह का नारा जब किसीने लगाया है

नूर वाले आक़ा का जश्ने-विलादत आया है

शजर सज्दे को झुके और कलमा पत्थर भी पढ़ेआप का पा कर इशारा शम्स वापस आया है

नूर वाले आक़ा का जश्ने-विलादत आया है

ला-मकां तक है रसाई, जिन की जग में बादशाहीउनके जैसा ना ख़ुदा ने और कोई बनाया है

नूर वाले आक़ा का जश्ने-विलादत आया है

मिदह़ते-सरकार में कट जाए अफ़ज़ल की उमरये भी कहने वाला हो के पास कोई सरमाया है

नूर वाले आक़ा का जश्ने-विलादत आया हैजिनके आने से सारे आलम में नूर छाया है

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।