नात लिरिक्स

Najaf Ke Shah Ko Dukhda Sunane Jaunga | Najaf Ke Shah Ko Dukhra Sunane Jaunga

नजफ़ के शाह को दुखड़ा सुनाने जाऊँगा

उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नजफ़ के शाह को दुखड़ा सुनाने जाऊँगा'अली, ख़ुदा के वली को मनाने जाऊँगा

नजफ़ के शाह को दुखड़ा सुनाने जाऊँगा

हैं मुस्तफ़ा के वो दामाद, रब के प्यारे हैंजो बे-सहारे हैं उन के 'अली सहारे हैंउन्हीं को ग़म की कहानी सुनाने जाऊँगा

नजफ़ के शाह को दुखड़ा सुनाने जाऊँगा

मुरादें मिलती हैं मुश्किल-कुशा की चौखट परये आरज़ू है 'अली मुर्तज़ा की चौखट परहसन-हुसैन का सदक़ा मैं पाने जाऊँगा

नजफ़ के शाह को दुखड़ा सुनाने जाऊँगा

नजफ़ का शहर यक़ीनन दयार-ए-रहमत हैदर-ए-'अली मेरी नज़रों में रश्क-ए-जन्नत हैमैं अपने दिल में वो जन्नत बसाने जाऊँगा

नजफ़ के शाह को दुखड़ा सुनाने जाऊँगा

ग़रज़ किसी से नहीं, उन से है उमीद-ए-करमबहुत तवील है अपनी ये दास्तान-ए-अलम'अली सुने न सुने, मैं सुनाने जाऊँगा

नजफ़ के शाह को दुखड़ा सुनाने जाऊँगा

ज़माने भर की परेशानियों ने घेरा हैमेरी हयात में चारों-तरफ़ अँधेरा हैगुज़र रही है जो दिल पर बताने जाऊँगा

नजफ़ के शाह को दुखड़ा सुनाने जाऊँगा

मैं लड़खड़ाया तो मौला मुझे सँभालेंगेयक़ीन है मुझे मौला गले लगा लेंगेमैं उन के दर पे जबीं को झुकाने जाऊँगा

नजफ़ के शाह को दुखड़ा सुनाने जाऊँगा

नशीद-ख़्वाँ:मुबारक बेग़मअमजद बल्तिस्तानीमु'अज़्ज़म अली मिर्ज़ा

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