नात लिरिक्स

Nabi Syed Ul Ambiya Ke Barabar | Na Pehle Tha Koi Na Ab Hai Na Hoga

नबी सय्यिद-उल-अंबिया के बराबर | न पहले था कोई न अब है न होगा

नात ख़्वान: नुसरत फ़तेह अली ख़ानशायर: पुरनम इलाहाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कुल अंबिया से अफ़ज़ल 'आली मक़ाम हैं वोअल्लाह भेजता है जिस पर सलाम हैं वोअक़्सा में की इमामत सारे पयम्बरों कीसारे पयम्बरों के बेशक इमाम हैं वो

नबी सय्यिद-उल-अंबिया के बराबरन पहले था कोई न अब है न होगामुहम्मद का सानी, मुहम्मद का हम-सरन पहले था कोई न अब है न होगा

उन सा, पहले था कोई न अब है न होगा

अगर है तो इक ज़ात अल्लाह की हैजो ज़ात-ए-मुहम्मद से आ'ला है वर्नामुहम्मद से आ'ला, मुहम्मद से बढ़ करन पहले था कोई न अब है न होगा

उन सा, पहले था कोई न अब है न होगान पहले था कोई न अब है न होगा

जिसे हक़ ने बुलवाया 'अर्श-ए-'उला परहुआ फ़ज़्ल-ए-हक़ से जो मेहमान-ए-दावरख़ुदा की ख़ुदाई में ऐसा पयम्बरन पहले था कोई न अब है न होगा

उन सा, पहले था कोई न अब है न होगान पहले था कोई न अब है न होगा

ज़ुलैख़ा थीं जिस पे फ़िदा जान-ओ-दिल सेवो यूसुफ़ बड़े ख़ूबसूरत थे लेकिनरुख़-ए-मुस्तफ़ा से हसीं रु-ए-अनवरन पहले था कोई न अब है न होगा

उन सा, पहले था कोई न अब है न होगान पहले था कोई न अब है न होगा

नबी सारे महबूब हैं किब्रिया केमगर ये भी सच है ब-जुज़ मुस्तफ़ा केहबीब-ए-ख़ुदा दोनों 'आलम का दिलबरन पहले था कोई न अब है न होगा

उन सा, पहले था कोई न अब है न होगान पहले था कोई न अब है न होगा

बड़ाई में, पुरनम ! वो बा'द-अज़-ख़ुदा हैंशह-ए-अंबिया हैं, शह-ए-दोसरा हैंबशर उन के रुत्बे का, अल्लाहु-अकबर !न पहले था कोई न अब है न होगा

उन सा, पहले था कोई न अब है न होगान पहले था कोई न अब है न होगा

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